Skip to main content

कितने अलग लेकिन कितने करीब



बालकनी में बैठे हुए गुलाब और मोगरे के फूलों को निहारते हुए अजय और प्रगति झूले में बैठे  कुछ सोच रहे थे। दोनों एक साथ बोल पड़े  ' 1७ साल ...'

दोनों मुस्कुराए ।

प्रगति बोली ...'अजय ,लगता ही नहीं हम दोनों की शादी को 1७ साल हो गए।'

 अजय ने कहा...' हां सचमुच ऐसा लगता है ,बस कल परसों की ही तो बात है कि हम मिले थे।'

उनका 1५ साल का बेटा राहुल  भी वहां पर आ गया .।

उसने कहा...' मम्मी -पापा मैं आपसे एक बात पूछूं?'

दोनों ने कहा....' हां, हां! राहुल क्या बात है ???पूछो ना'

राहुल बोला ..'मम्मी -पापा आप दोनों एक दूसरे से कितने अलग हो ।पापा हैं कि  ज्यादा बातें नहीं करते और मम्मी आप कभी चुप नहीं रहती ।पापा को बाहर घूमना पसंद नहीं और मम्मी को बाहर जाना अच्छा लगता है।मम्मी आप छोटी-छोटी बातों में हंस देती हो और पापा तो  अच्छा चुटकुला सुनाने पर भी सिर्फ मुस्कुरा देते हैं।'

 क्या आप दोनों सचमुच एक दूसरे के साथ खुश हो?

आपके बीच कभी  झगड़ा भी नहीं होता।

'तब अजय और प्रगती एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे और अजय ने राहुल के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा ...

बेटा , विवाह के समय जब  दो व्यक्ति एक दूसरे के साथ सारा जीवन साथ बिताने का वचन देते हैं, तभी वह अपने जीवन साथी को उसी रूप में स्वीकार करते है जैसा वह है।मैं और तुम्हारी मम्मी बेशक एक दूसरे से बहुत अलग -अलग है ।हमारे व्यक्तित्व एक दूसरे से अलग है ।लेकिन हम एक दूसरे के व्यक्तित्व का सम्मान करते हैं। लेकिन यह भी सही है हम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं ,इसलिए एक दूसरे की खुशी के लिए कभी-कभी हम हमारे स्वभाव को थोड़े समय के लिए बदल लेते हैं।

 जैसे कि मैं तुम्हारी मम्मी के साथ बाहर जाता हूं तो मुझे भी अच्छा लगता है ।मैं बेशक मुस्कुराता हूं लेकिन तुम्हारी मम्मी की खिलखिलाती हंसी मुझे बहुत अच्छी लगती है ।

तभी प्रगति बोली....' माना कि मुझे बहुत बोलना पसंद है लेकिन तुम्हारे पापा का शांत स्वभाव मुझे सबसे ज्यादा पसंद है ।मैं तुनक मिजाज हूं लेकिन तुम्हारे पापा का धैर्य ,धीरज मुझे बहुत अच्छा लगता है ।हम दोनों एक दूसरे  से अलग जरूर है ,लेकिन हम ही एक दूसरे को पूरा करते हैं। कभी तुम्हारे पापा मुझे संभालते हैं तो कभी मैं उन्हें संभाल लेती हूं।

एक सफल और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए यह जरूरी नहीं कि एकसा   स्वाभाव रखने वाले ,एक सी विचारधारा रखने वाले, एक से खानपान वाले व्यक्ति आपस में साथ में रहे ,जरूरत इस बात की है कि दोनों एक दूसरे का सम्मान करें ।दोनों एक दूसरे को समझे।

विवाह बंधन नहीं संबंध है जिसमें दोनों के बीच इतनी जगह होनी चाहिए कि दोनों एक दूसरे से अपने मन की बातें कह सकें।

राहुल को अपने माता -पिता के बीच की यह समझदारी, यह साझेदारी बहुत अच्छी लगी और उसने अपनी मम्मी -पापा से कहा कि आप दुनिया के सबसे बेस्ट हस्बैंड वाइफ हो।

(विवाह के बारे में आप अपने विचार मुझसे जरूर साझा करें और यदि आपको यह रचना अच्छी लगी हो तो कृपया इस रचना को लाइक करें। आप मुझे फॉलो भी कर सकते हैं।)


Comments

  1. Pragati ajay n rahul k badle payal manish n taksh bhi likh sakte hai na😜😜

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

अब नहीं होंगे गर्मी की छुट्टियों में बच्चे बोर

 गर्मी की छुट्टियों का इंतजार बच्चों को बेसब्री से होता है ।पूरे साल में यही वे दिन होते हैं जब वे बिना किसी टाइम टेबल के समय बिताते हैं । लेकिन गर्मी की छुट्टियां आते ही ,बच्चों के मम्मी और पापा परेशान से हो जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी यही परेशानी होती है ,कि  बच्चों को पूरा दिन कैसे व्यस्त रखा जाए??? क्योंकि  बच्चे ज्यादातर समय अपना इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे कि मोबाइल ,लैपटॉप ,टीवी आदि में दे देते हैं । तो चलिए आप सभी के लिए मैं कुछ सुझाव लाई हूं ,आशा करती हूं कि यह सुझाव आपके बच्चों के जरूर काम आएगा। गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को किसी  टाइम टेबल  के तहत ना बांधे । गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए  आपका साथ  सबसे ज्यादा जरूरी होता है। बच्चों को प्रकृति से मिलाएं आपके आसपास यदि कोई  नर्सरी  है तो आप बच्चों को वहां ले जा सकते हैं ।जहां वे नए -नए पौधों के बारे में, इनडोर -आउटडोर प्लांट्स के बारे में जानकारी पा सकते हैं ।उनके मनपसंद  पौधों को घर लेकर आए और उसमें पानी डालने की जिम्मेदारी बच्चे क...

रात के खाने में क्या बनाऊं???? एक राष्ट्रीय समस्या

रात के खाने में क्या बनाया जाए??? इसे  एक राष्ट्रीय समस्या घोषित कर देना चाहिए।  हर एक घर में शाम होते ही मम्मी की आवाज शुरू हो जाती है, आज खाने में क्या बनाऊं ??? फोन करके पति को पूछा जाता है ..आज खाने में क्या खाओगे???  यह बात और है कि पत्नी बनाती वही है ,जो वह चाहती है ।लेकिन पूछना मानो उसका नियमित कर्म हो   ।वह सिर्फ यह सुनना चाहती है कि...कोई यह कह दे कि खिचड़ी बना लो । लेकिन मजाल है जो घर का कोई भी  सदस्य  यह कह दे कि..आज खिचड़ी बना लो।  बच्चों से पूछा जाए तो बच्चे कहते...' मम्मी कुछ  अच्छा बनाना आज'   बहुत दिन हो गए ...बस कुछ अच्छा बना लो मम्मी आज । पतिदेव को पूछो तो  पतिदेव कहते हैं ...' जो बनाना हो बना लो.... सब चलेगा '(क्योंकि जनाब, पतिदेव पत्नी की आदत से अब पूरी तरह से वाकिफ हो चुके हैं)  इस बात से पत्नी कभी संतुष्ट नहीं होती, दोबारा पूछती है । कुछ भी का क्या मतलब होता है??? कुछ तो बताओ  । रोज  यही पूछना पड़ता है। मैं भी परेशान ह...

डिब्बे की अदला बदली से खुल गई पोल

ममता की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे । वह खुद को अपने ससुराल के रंग में रंगने की कोशिश कर रही थी ।इत्तेफाक से उसकी ननद का नाम भी ममता ही था ।हालांकि ममता दीदी उससे बड़ी थी और उनकी शादी हो चुकी थी। वह अपने ससुराल में बेहद खुश थी।  सावन का महीना शुरू होने ही वाला था।  ममता का यह पहला त्यौहार था इसलिए सांस ने सोचा क्यों ना बहू को साड़ी दे दी जाए।  सास और बहू दोनों ही साड़ी की दुकान पर पहुंच गई। सास ने बहू से कहा  ...'बहु तुम अपने लिए साड़ी पसंद कर लो, लेकिन ध्यान रखना ज्यादा महंगी मत लेना अभी शादी पर बहुत खर्चा हुआ है।'मैं तुम्हारी ममता दीदी के लिए भी एक सस्ती सी साड़ी देख लेती हूं तब तक।' बहू को लगा कि  सास सही कह रही है।उसने ₹१७00 की साड़ी पसंद कर ली ।तब तक सास ने भी ममता दीदी के लिए साड़ी पसंद कर ली और तुरंत ही दुकानदार को दोनों साड़ियों को डिब्बों में पैक करवाने के लिए भी कह दिया।सास ने तुरंत बिल भर दिया ।जिस पर ममता का कोई ध्यान नहीं था।  दोनों खुशी-खुशी घर लौट आए ।  बहु के हाथ से सासुमा ने  साड़ी का ए...