नमस्कार !!!
(आज फिर से मैं आपके सामने मेरा एक अनुभव बांटना चाहती हूं .आशा करती हूं कि आप को पढ़ कर अच्छा लगेगा .शायद आपको भी ऐसे अनुभव हुए होंगे .
मेरे अनुभव मैंने आपके साथ सांझा किए आप अपने अनुभव मेरे साथ बांटना जरूर....)
(आज फिर से मैं आपके सामने मेरा एक अनुभव बांटना चाहती हूं .आशा करती हूं कि आप को पढ़ कर अच्छा लगेगा .शायद आपको भी ऐसे अनुभव हुए होंगे .
मेरे अनुभव मैंने आपके साथ सांझा किए आप अपने अनुभव मेरे साथ बांटना जरूर....)
कभी आपके साथ ऐसा हुआ है क्या ???
आपको किसी ने पहली नजर में सिर्फ आपके पहनावे, आपके बात करने के तरीके को देखकर एक अनुमान लगा लिया हो ,कि आप कैसे हैं ???
या यूं कहें कि वह आपको पूरी तरह से जाने बगैर ही आपके बारे में अपनी राय बना लेता है .
कितना आसान होता है हमारे लिए ,दूसरों के लिए जजमेंटल हो जाना ,बिना जाने -पहचाने ,समझे.
ऐसा मेरे साथ अक्सर होता है.
सबसे पहली बार मुझे यह अनुभव तब हुआ जब मेरा बेटा 4 साल का था. बहुत बड़ी स्कूल में उसका एडमिशन हुआ था .लेकिन मैं बहुत ही साधारण सी दिखने वाली, बहुत ही सिंपल बातें करने वाली मां थी ..और उस स्कूल में जितने भी बच्चे पढ़ते थे उनकी मम्मी कार से आती थी. इंग्लिश में बातें करती थी.
सबसे पहली बार मुझे यह अनुभव तब हुआ जब मेरा बेटा 4 साल का था. बहुत बड़ी स्कूल में उसका एडमिशन हुआ था .लेकिन मैं बहुत ही साधारण सी दिखने वाली, बहुत ही सिंपल बातें करने वाली मां थी ..और उस स्कूल में जितने भी बच्चे पढ़ते थे उनकी मम्मी कार से आती थी. इंग्लिश में बातें करती थी.
स्कूल में मेरे काफी दोस्त बने भी .लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने कुछ दूरी बनाई हुई थी .
स्कूल में एलोक्यूशन प्रतियोगिता थी.उस में मेरे बेटे को सेकंड प्राइज मिला था .मैं बहुत खुश थी, जो कि मैंने उसका परफॉर्मेंस नहीं देखा था ,लेकिन फिर भी टीचर ने उसकी काफी तारीफ की थी .
उसके बाद तो न जाने क्या हुआ.
उसका नाम आते ही लोगों को यह यह जानने में दिलचस्पी थी कि उसकी मम्मी कौन है ??? फिर क्या था, मैं मेरे नाम से नहीं मेरे बेटे के नाम से पहचाने जाने लगी.
कुछ लोग जो दूर से ही मुझे देखते थे. वह पास आकर अपना इंट्रोडक्शन खुद देकर मुझसे पूछने लगे 'कि एलोक्यूशन की तैयारी आपने कैसे करवाई ??
आप उसे कैसे पढ़ाती हैं ??
कुछ लोग जो दूर से ही मुझे देखते थे. वह पास आकर अपना इंट्रोडक्शन खुद देकर मुझसे पूछने लगे 'कि एलोक्यूशन की तैयारी आपने कैसे करवाई ??
आप उसे कैसे पढ़ाती हैं ??
मुझे सचमुच बहुत अच्छा भी लग रहा था उस समय. पर ना जाने क्यों ऐसा लग रहा था कि क्या यदि मेरा बेटा उस कंपटीशन नहीं जीता होता तो इतने लोग मुझे जान पाते ???
किसी का भी जजमेंटल होना बिल्कुल सही नहीं .
किसी का भी जजमेंटल होना बिल्कुल सही नहीं .
आपको क्या लगता है? प्लीज कमेंट करके मुझे बताइएगा.
aisa aksar hota hai. kyoki hamare samaj me gora hona sundarta ka aur english me baat karna intelligent ka paryaay mana jata hai. jise hum abhishaap kah sakte hai.
ReplyDeleteWell said Beena.
Delete