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क्या स्त्रीत्व मात्र सुंदरता का पर्याय है????

आज अचानक मैंने यह बात अनुभव की ,टीवी पर जितनी भी ऐड आती है उसमें से ज्यादा ऐड शैंपू ,साबुन, गोरा करने की क्रीम, हेयर कलर करने के लिए बहुत सारे कलर ,कुल मिलाकर आप को सुंदर बनाने के नए-नए प्रोडक्ट्स सेल किए जाते हैं.
वास्तविकता तो यही है की महिलाओं ने यह मान लिया है कि सुंदर होना सबसे ज्यादा जरूरी है .यूं कहें कि स्त्रीत्व सुंदरता का पर्याय है .
आज भी 10 में से 7 या 8 महिलाएं रोज सुबह उठकर यही सोचती होंगी, जब वह खुद को आईने में देखती होंगी कि आज से मैं डाइट करूंगी... या आज से मैं जिम जाऊंगी ..मैं योगा करूंगी ...क्योंकि मुझे अगले महीने शादी पर जाना है तो मुझे सुंदर दिखना है।
या 2 महीने के बाद मेरी एनिवर्सरी है और उस एनिवर्सरी पर मुझे मेरी शादी का ही लहंगा पहनना है।
इस बात से कोई एतराज नहीं है कि हर एक इंसान को खुद के स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए । शरीर को स्वस्थ रखने में और सिर्फ सुंदर दिखने की चाह में बहुत फर्क है।
बाहरी रूप ,रंग आप की परिभाषा नहीं है ।आपका व्यक्तित्व आपकी परिभाषा है ।आपका सुंदर चेहरा आकर्षक है तो लोग जरूर उसकी तारीफ करेंगे ।लेकिन यदि आपका मन आपके विचार आपका व्यक्तित्व आकर्षक है... तो लोगआप के सामने और आपके पीछे भी आपको याद करेंगे.
तो केवल इस स्पर्धा में दौड़ने का कोई अर्थ नहीं कि मुझे सुंदर देखना है ,मुझे दुबला होना है, मुझे हमेशा अपनी त्वचा को, अपने चेहरे को जवान रखना है . क्योंकि सुंदरता ही मेरी पहचान है.......
बल्कि हमें यह सोचना चाहिए कि हम अपने विचारों को अपनी सोच को हमेशा उत्तम रख सकें...

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