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खुश रहने की चाबी...." संतोष "

महिमा और अजय  का प्रेम विवाह हुआ। दोनों ही सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते थे। दोनों ही अपनी शादी से बेहद खुश थे ।उन्हें अपनी कंपनी से ही विदेश जाने का मौका भी मिल गया ।वहां महिमा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया। उन्होंने विदेश में रहकर नौकरी करके अच्छा खासा पैसा जमा कर लिया था और अब वे भारत लौटने की तैयारी कर रहे थे।

महिमा और अजय अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित रहा करते थे। दोनों को ही अपनी जिंदगी में बहुत बड़े-बड़े सपने पूरे करने थे। दोनों अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी-जान से कोशिश करने लगे ।धीरे-धीरे इन सपने को पूरा करने की जिद में उनसे बहुत कुछ पीछे छूटता चला गया।

 मम्मी- पापा, भाई -बहन ,रिश्तेदार , दोस्त बस नाम के लिए ही रह गये। महिमा और अजय 24 घंटे साथ रहा करते लेकिन उनकी निजी बातें एक मिनट भी नहीं होती ।सारा समय सिर्फ काम की ही बातें होती। अपनी बेटी को भी उन्होंने यही सिखाया कि उसे सिर्फ पढना है और  बड़ा हो के अपना नाम बनाना है ।बेटी भी उनके रंग में रंग गई। दिन भर किताबों में खोई रहती ।

उम्र के 50वे साल में महिमा और अजय प्रवेश कर रहे थे। तब उन्हें ऐसा लगने लगा कि कुछ तो है जो अब तक हमें नहीं मिला ।लेकिन वह क्या है ??हमारे पास आज पैसा है ,प्रॉपर्टी है, नाम है ,अखबारों में तस्वीरें हैं ।फिर क्यों हम खुश नहीं हैं???

अपने खास दोस्त जो सिर्फ एक या दो ही थे उन्होंने उनसे मुलाकात की ।उन्होंने कहा कि 'तुम लोग  हमेशा खुश रहते हो, सारी चीजें इंजॉय करते हो।'

 एक सवाल था तुमसे कि  ' कैसे मिलेगी खुशी??? कैसे रहे हम खुश ???'

उनके दोस्तों ने सिर्फ एक जवाब दिया कि 'अजय जब तुझे ऐसे लगे कि जिंदगी में जो तेरे पास है वो बहुत है ,उसमें तू सुखी है। तुझे उसमें संतोष मिल जाता है ।उस दिन तुझे खुशी मिलेगी।
 बहुत कुछ पाने की लालसा जब तक तेरे दिल में रहेगी, तो तू कैसे खुश हो पाएगा ???क्योंकि हर वक्त तेरे दिमाग में सिर्फ यही रहेगा कि तुझे कुछ पाना है... क्योंकि वह तेरे पास नहीं है ।

'क्यों नहीं इसका दूसरा पहलू देखता तू.. कि जो कुछ  तेरे पास है  वो कितना सारा है ।जब ऐसे सोचने लगेगा तो खुश रहने लगेगा मेरे दोस्त ।'

कितनी छोटी सी बात थी। अजय और महिमा ने उनकी बातों को गांठ बांध लिया और अब तक उन्होंने जितनी सफलताएं अपने जीवन में देखी थी वे उससे  संतुष्ट रहना सीख गए ।वे अब रिश्तेदारों के यहां जाने लगे। मम्मी-पापा के साथ समय बिताने लगे। दोस्तों के साथ पिकनिक करने लगे ।अपनों को समय देने लगे और उन्हें अपनों का समय और प्यार भी मिलने लगा और अब वे दोनों  खुश रहने लगे।

(इस कहानी के माध्यम से मैं सिर्फ यही कहना चाहती हूं कि जीवन में सपने भी देखना चाहिए और उन्हें पूरा करने की जिद भी होनी चाहिए लेकिन सपनों को पूरा करने के लिए छोटी-छोटी खुशियों को मनाना मत भूल जाइएगा। इस रचना को समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! यदि आपको मेरे लेख, कहानियां पसंद आए तो आप मुझे फॉलो भी कर सकते हैं ।धन्यवाद!)

 आपकी अपनी सखी

पायल



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