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खुद को पहचानिए

आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार!

 ना तो यह कहानी है, ना तो कोई लेख ।यह तो हमारी और आपकी मन की बातें हैं।

 आपको ऐसा नहीं लगता कि हम सभी ज्यादातर शिकायतें करते हैं ???? दूसरों में कमियां निकालते हैं???

कभी सास की तो ,कभी ना नंद की ,कभी बहू की, तो कभी पति की ,कभी पड़ोसियों की ,तो कभी दोस्तों की ,कभी अपने  ऊपर होने वाले विश्वासघात की तो ,कभी खुद पर किए जाने वाले व्यंग की ,कभी मायके में सम्मान ना मिलने की, तो कभी भाई -बहनों के साथ अनबन की.....

कितनी सारी शिकायत है हमें सबसे..

 पर आपको नहीं लगता कि हम जिस से शिकायत कर रहे हैं उनमें से हम खुद भी एक हैं ???

यानी कि ऐसे भी लोग होंगे जिन्हें हम से शिकायत होगी ।

चलिए आज हम स्वयं का आकलन करते हैं ।

एक बेटी है ,एक बहू है, एक पत्नी है ,एक मां है, एक कामकाजी महिला हो, या एक घरेलू महिला ,एक पड़ोसी एक दोस्त, एक बहन, एक ननंद ,एक भाभी और बहुत सारे रिश्ते....

 आपको क्या लगता है कौन सा रिश्ता आप 100% पूरी ईमानदारी से सचमुच निभा रही है????

 कौन सा ऐसा काम है जिसे आप निस्वार्थ हंसते हुए कर रहे हैं???

क्या सचमुच आपने कभी किसी के साथ अन्याय नहीं किया ??


क्या हमसे कभी कोई कटु शब्द नहीं निकले?

 क्या हमने कभी अपनी ननद को, कभी अपनी बहन, कभी अपने भाई या कभी अपनी मां ,कभी अपनी सास कभी अपने दोस्त ,कभी अपने पड़ोसी का दिल नहीं दुखाया ???

क्या सचमुच हम एक ऐसे इंसान है जि ससे कभी भूल नहीं हुई ??!

कहते हैं कि दूसरों को दोष देना यानी कि  दूसरों पर उंगली उठाना बहुत सहज है, बहुत आसान है ।

लेकिन स्वयं का आकलन करना उतना ही मुश्किल।

 शायद कभी हम इस बारे में सोचते ही नहीं।

 सच तो यह है कि कोई भी इंसान ऐसा नहीं जिसमे कोई त्रुटि ना हो कोई दोष ना हो ।हर एक इंसान में कमियां होती है ।लेकिन जो अपने व्यवहार को समय रहते सही कर ले वही व्यक्ति सही मायने में रिश्ते निभा सकता है।

कभी अपनी बोली में मिठास लाकर ,तो कभी दूसरों के किए हुए कार्यों पर तारीफ के दो शब्द बोल कर, कभी किसी की तकलीफ को अपनी तकलीफ की तरह समझ कर , किसी के बुरे वक्त पर उसका साथ देकर ।

क्योंकि  जिंदगी में रिश्तो को संभालने के लिए कोई स्कूल कोई पाठशाला नहीं होती जहां हम पैसे देकर रिश्तो को कैसे जिया जाए यह सीख सकें।

दूसरों के प्रति आपका सद व्यवहार ,दूसरों के लिए आपके दिल में प्रेम ,सहानुभूति आपको उत्तम व्यक्ति बनाती है।

यदि हम सभी अपने अहम को खुद से अलग रखें तो हम शायद सारे रिश्तों को पूरी ईमानदारी से निभा सकेंगे।


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