2 साल के अफेयर के बाद परिवार वालों की रजामंदी के साथ अंजली और रमन ने शादी कर ली। रमन के मम्मी और पापा गांव में रहते थे और अंजलि के मम्मी पापा मुंबई में ही रहते थे इसलिए अंजलि के लिए बहुत आसान था, जब भी कोई परेशानी होती, मम्मी को फोन कर लेती या मम्मी को बुला लिया करती।
अंजली की मम्मी को भी लगता कि रमन और अंजली की नई नई शादी हुई है , उन्हें किसी बड़े की जरूरत पड़ती है।
लेकिन धीरे - धीरे अंजली के लिए यह सबसे आसान तरीका बन चुका था ।दिवाली की मिठाई बनाना हो या गर्मियों का अचार, घर में साफ सफाई करवाना हो या घर के किसी भी काम में जब उसे परेशानी होती, वह मम्मी की बुला लेती।
रमन को अंजली की इस बात से कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि रमन दिनभर ऑफिस में रहता और पीछे से अंजलि सारे काम कर दिया करती तो फिर उसे कोई परेशानी कैसे हो सकती थी।
समय बीतने लगा और रमन और अंजली के घर एक छोटे से मेहमान के आने की खुशखबरी आईं ।अंजलि ने तो पहले ही तय किया था कि वह पूरे समय अपनी मां के घर रहेगी या मां को अपने पास बुला लेगी ।अंजली की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए इस बार भी अंजली की मां ने अंजली से कुछ नहीं कहा और पूरे 9 महीनों तक अंजली की देखभाल की।रमन भी अंजलि को मिलने आता जाता रहता था।
अंजली की मां ने अंजली के बच्चे को भी बहुत अच्छे से 4 महीने का बड़ा कर दिया। तब जाकर अंजलि ने सोचा कि अब उसे अपने घर जाना चाहिए और वह अपने घर चली गई ।वहां जाते ही हर छोटी-छोटी चीज के लिए फिर से अपनी मां को फोन किया करती।
बच्चे को हल्का सा बुखार भी आ जाए तो मां को घर बुला लिया करती थी। लेकिन अब अंजली की मां को लगने लगा था कि अंजलि अपनी जिम्मेदारियां उठाना ही नहीं चाहती।
मां उसे अक्सर समझाया करती थी कि हर छोटी-छोटी चीज के लिए उसे इस तरह उन्हें नहीं बुलाना चाहिए। अंजली को अपनी जिम्मेदारियां लेनी चाहिए।
पर अंजलि हमेशा यही कहती...' तू यही तो रहती है, आ जाया कर मां... मेरी मदद कर दिया कर.. तुझे और क्या काम है ???
अंजली की मम्मी को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी। एक दिन अंजलि को किटी पार्टी में जाना था ।अपनी आदत के अनुसार उसने अपनी मां को फोन किया, लेकिन इस बार अंजली की मां ने तय किया कि अब अंजली की कोई मदद नहीं करेगी। इसलिए उन्होंने फोन नहीं उठाया। उसे लगा कि मा का फोन बंद हो गया होगा । अंजली को बच्चे को साथ लेकर किटी में जाना पड़ा। वहां वह बच्चे के कारण परेशान हो गई ।घर आकर उसने दोबारा मां को फोन किया। इस बार भी मा ने फोन नहीं उठाया।
उस रात तो मानो अंजली का गुस्सा सातवें आसमान पर था ।अगले दिन रमन ने अपने बॉस को खाने पर बुलाया था । लेकिन अंजली ना तो घर संभाल पा रही थी ना बच्चे को संभाल पा रही थी। तो फिर खाना तो बहुत दूर की बात थी ।
अंजली चिड़चिड़ा कर रमन से बोली...' ये मां भी गजब करती है, घर पर यूं ही खाली बैठी है ,यह नहीं कि घर आकर मेरी मदद करें। अब यह सब मैं कैसे करूंगी??? मुझे लगा था मां खाना बना देगी।मैंने उनको बोला भी था दो दिन पहले।
लेकिन अब सब कैसे होगा ???
रमन ने कहा...' तुम चिंता मत करो। मैं बच्चे को थोड़ी देर संभालता हूं ।तब तक तुमसे जो बन पड़े बना लो। बाकी का खाना मैं बाहर से मंगवा लूंगा। आखिरकार यह हमारा घर है और हमारे घर की जिम्मेदारियां हमारी है ।'
रमन ने कहा...' तुम चिंता मत करो। मैं बच्चे को थोड़ी देर संभालता हूं ।तब तक तुमसे जो बन पड़े बना लो। बाकी का खाना मैं बाहर से मंगवा लूंगा। आखिरकार यह हमारा घर है और हमारे घर की जिम्मेदारियां हमारी है ।'
दोनों ने मिलकर सारे काम कर लिए। बॉस भी खाना खा कर चले गये।
लेकिन अंजली का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ था।
तभी रमन में उसे समझाते हुए कहा ...'अंजलि आज मा ने जो किया, बहुत सही किया ।कब तक वो हमारी मदद करती। ये हमारी गृहस्थी है, हमारा बच्चा है ,हमारा घर है।
हमारे घर के लिए हमारी जो जिम्मेदारियां हैं वह हमें निभानी चाहिए ।हम दोनों मिलकर अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
अंजली भी अपनी गलती समझ चुकी थी और उसका गुस्सा भी अ ब शांत हो गया था। उसे अब महसूस हुआ कि आज मां ने फोन क्यों नहीं उठाया???
कुछ दिनों के बाद अंजली ने अपने मम्मी और पापा को खाने पर बुलाया और ढेर सारे पकवान बनाए। मम्मी ने अंजली का घर देखा तो बहुत खुश हो गई। अंजली ने घर को बहुत अच्छा सजाया था, बच्चा भी पूरी तरह से स्वस्थ था , खाना भी बहुत स्वादिष्ट था ।देर से ही सही अंजली समझ गई थी कि खुद के घर को सवारना खुद की ही जिम्मेदारी है।
(इस रचना को अपना समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!? इस कहानी के माध्यम से मै सिर्फ यही कहना चाहती हूं ,कि हर एक नवविवाहित दंपति को स्वयं अपनी जिम्मेदारियां उठाना सीखना चाहिए।)
आपकी सखी
पायल
👌
ReplyDeleteHaan bilkul..aur yeh jimmedariya uthane main bhi apna alag he maza hai! 😊👍
ReplyDeleteबिल्कुल
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