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वो रात






मार्च का महीना था। पूजा और अनिल अपने ९ महीने के बेटे आर्यन को लेकर महाबलेश्वर के लिए निकले।वहां पहुंचने में उन्हें कोई परेशानी  नहीं हुई। अनिल ने भी वहां रुकने की व्यवस्था बेहतरीन होटल 🏨 में करवाई थी।जहा आर्यन के लिए कमरे में झूला था।अनिल ने वहां के मैनेजर से बात करके यह तय कर लिया कि समय -समय पर आर्यन के लिए   दूध ,खिचड़ी, उबला हुआ पानी आदि कमरे  में पहुंच जाये।

तीनो ने वहां ४ दिन बहुत अच्छे से बिताए।बहुत सारी तस्वीरें ली।कोई तकलीफ़ नहीं हुई।आर्यन ने भी मज़ा किया।

जाने का समय आ गया ।दोनों ने सामान बांध लिया।बस भी निर्धारित समय पर आ गई।

अनिल ने बस की दूसरी सीट बुक की थी ,ताकि आर्यन को परेशानी ना हो। सभी यात्री बस में बैठ चुके थे ।आर्यन भी नींद में आ चुका था। पूजा और अनिल इत्मीनान से बैठे थे। उन्हें लगा थोड़ी देर बाद आर्यन सो जाएगा और वह इस बात का शुक्र मना रहे थे कि उनकी महाबलेश्वर की यात्रा सुखद रही। कुछ ही मिनट बीते थे और ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की ।

कन्डेक्टर   सबसे सही जगह पर बैठने का अनुरोध कर ही रहा था ,कि आर्यन का रोना शुरू हो गया।

 शुरू में पूजा ने उसे गोद में उठाया ।

फिर अनिल ने उसे चुप कराने की कोशिश की, लेकिन आर्यन का रोना बढ़ गया ।

धीरे-धीरे सहयात्रियों को भी परेशानी का अनुभव होने लगा ।

किसी ने कहा कि' उसे भूख लगी होगी उसे दूध पिलाओ।'

 पूजा ने कोशिश की.... लेकिन आर्यन को दूध नहीं पीना था ।

अनिल ,आर्यन को लेकर बस में टहलने लगा, लेकिन फिर भी उसकी रुलाई बंद ना  हुई।

 तो किसी ने कहा बच्चा रो रहा है.... 'बाप  कैसे चुप कराएगा??? मां क्या कर रही है ????मां को बोलो बच्चे को चुप कराएं ।'

आर्यन चुप होने का नाम नहीं ले रहा था ।

अनिल ने पूजा को  सुझाव दिया कि वह बस छोड़ दे और सुबह होने के बाद दूसरी बस पकड़कर मुंबई वापस रवाना हो जाएंगे ।

पूजा ने कहा कि ....'नहीं आर्यन को   बस  नींद आ रही है।'

 पिछले 15 मिनट से आर्यन रो रहा था। सारे लोग परेशान हो गए ।

ड्राइवर भी परेशान हो चुका था। उसने कंडक्टर को कहा कौन है??? यह कितना हल्ला हो रहा है।

 कंडक्टर  ने पूजा के पास आकर कहा ...'मैडम क्या परेशानी है ???ज्यादा है तो आप लोग उतर जाइए ,.सब लोग परेशान हो रहे हैं ।'

अब तो पूजा  का  सब्र का बांध टूट गया। उसने कहा कि  आर्यन को सिर्फ नींद आ रही है ,लेकिन  बस में वह सो नहीं पा रहा।

 फिर कंडक्टर ने कहा ऐसा करिए आप बस के पीछे मेरी सीट है ।आप वहां जाकर अपने बेटे को  सुला दीजिए ।

शायद उसका रोना बंद हो जाए।

 पूजा आर्यन को लेकर कंडक्टर के सोने की जगह पर गई।वहां कंडक्टर का मैला कम्बल ,तकिया  रखा हुआ था लेकिन  पूजा को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा ।

उसे तो सिर्फ अपने बच्चे का रोना बंद करना था।

 5 मिनट के अंदर ही आर्यन चुप हो गया।और सो गया।

अनिल और पूजा कंडक्टर का शुक्रिया अदा करते रहे। अनिल ने कंडक्टर से कहा ...'भाई साहब आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !आपने हमारी बहुत सहायता की ।'

अनिल ने उससे कहा ...'आप मेरी सीट पर बैठ जाइए। हमारी यहां 2 सीटें हैं ।'

अनिल ने कहा ...'.मैं खड़ा ही रहूंगा या मैं नीचे बैठ जाता हूं।'

 सचमुच एक बच्चे के लिए माता-पिता क्या नहीं करते ।

पूरी रात अनिल बस में  आर्यन और पूजा के  पास नीचे बैठा और पूजा ने कंडक्टर की जगह पर   आर्यन को सुलाकर ,वहीं थोड़ी सी जगह  बैठकर पूरी रात बिताई।उनकी एक सीट खाली ही रही।सारी रात आर्यन चैन से सोया।

सुबह 5:00 बजे बस मुंबई पहुंची।  पूजा ,अनिल ने दोबारा कंडक्टर का शुक्रिया अदा किया ।

कंडक्टर ने कहा ...'भाई साहब! कोई बात नहीं। बच्चा नींद में था बच्चे को क्या पता कि हर जगह घर जैसा आराम नहीं मिलता ।कोई बात नहीं ।चलिए सब कुछ ठीक तो हो गया ।

और उस फरिश्ते ने अनिल और पूजा से विदा ली।

अनिल और पूजा ने दिल से उसे दुआये दी।

अनिल और पूजा की दुआएं ...निश्चित ही उस कंडक्टर के जीवन में काम आएंगी।

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( इस रचना को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !!!आपको मेरी रचनाएं अच्छी लगे ,तो आप मुझे फॉलो भी कर सकते हैं)


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