महानगर में बीस मंजिला इमारत की, बारहवीं मंज़िल में प्रिया और अमित ने दो कमरों का एक घर किराए से लिया था। दोनों ही छोटे शहर में पले- बढ़े थे।उनके लिए ये घर एक सपने जैसा था।ऐसी सोसाइटी में जब वे रहने आए ,तो उन्होंने अपना रहन- सहन भी थोड़ा बदल लिया ।उनको सब कुछ बहुत अच्छा लगता था। यहां कोई एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं करता था। कुछ लोग लिफ्ट में सिर्फ मुस्कुरा देते।अमित, प्रिया भी अपने नए काम में बहुत व्यस्त रहते ,इसलिए उन्हें ये बात ज्यादा परेशान नहीं की।
अमित और प्रिया ने सोचा क्यों ना मम्मी को बुलाया जाए ।उनको भी ये नया घर ,नई सोसाइटी अच्छी लगेगी।
अमित की मम्मी (सविताजी )ने थोड़ी आनाकानी की, मगर फिर मान गई।आते ही बड़ी- बड़ी इमारतें देख वो चौंक गई।उनको नया शहर कुछ खास पसंद ना आया।लेकिन फिर बेटे बहू को खुश देख उन्हें लगा कि चलो अच्छा है ,अपने शहर से दूर है, मगर खुश तो है।
रोज़ सुबह अमित और प्रिया ऑफिस चले जाते।सविता जी घर के थोड़े काम निपटा कर खाना खा के आराम करती।शाम की चाय पीती ।रात के खाने की तयारी करती। तब तक दोनों घर वापिस आ जाते।अमित ,प्रिया ने उन्हें सोसाइटी तो अच्छे से दिखा दी थी । आसपास कोई बाज़ार नहीं था।समान लेने थोड़ा दूर जाना पड़ता था।ये बात सविता जी को बिल्कुल पसंद ना आई।
एक दिन शाम के ४.३० बजते ही सविता जी अपनी आदत के अनुसार चाय बनाने लगी ,तो देखा शक्कर ख़तम हो गई थी।बिना शक्कर की चाय उनसे पी नहीं जाती थी।उन्होंने प्रिया को फोन लगाया ,लेकिन फोन ना लगा।फोन बिस्तर पर रखकर वो सोचने लगी कि क्या करे।शाम के ५.३० बज गए। बिना चाय के तो सर दर्द होने लगा उनका।उन्होंने रसोई घर से एक कटोरी ली ,घर की चाबी ली और पड़ोस के घर पे जाके घंटी बजा दी।
दूसरी तरफ मा का मिस्डकाल देख प्रिया ने मा को फोन किए लेकिन मा ने फोन ना उठाया ।प्रिया को अब बहुत डर लगने लगा ।उसने तुरंत अमित को फोन किया और कहा...' कि मा घर पर फोन नहीं उठा रही है।'
दोनों जल्दी ही ऑफिस से निकल कर घर पहुंचे।घर जाकर घर की घंटी बजाई, तो मा ने दरवाजा भी नहीं खोला। अब चिंता उनकी दुगनी हो गई थी ।अपनी चाबी से घर खोल कर तुरंत घर के अंदर गए, तो मां घर पर नहीं थी ।दोनों अपना सर पकड़ कर बैठ गए कि आखिर मां चली कहां गई।
क्या हुआ मां को .....कहां गई होगी ????उनके लिए यह सोसाइटी तो पूरी नई है।
तुरंत ही वे दोनों लिफ्ट की तरफ भागे। उन्होंने सोचा वॉचमैन से पूछा जाए कि उन्होंने मां को देखा है ।
लिफ्ट आने का इंतजार कर रहे थे कि तभी पड़ोस से जोर -जोर से हंसने की आवाज सुनाई दी ।उन्होंने पड़ोसी घर पर जाकर देखा, तो पाया मां पड़ोसी के घर हंस बोल रही थी।
तुरंत वे उनके घर गए और उन्होंने कहा....'मा तुम यहां पर क्या कर रही हो????'
'हम कितने परेशान हो गए थे।'
'तुम कहां थी??? तुम ठीक तो हो??'
मां ने कहा ...अरे! तुम लोग इतनी जल्दी ऑफिस से आ गए ???अरे मैं तो ठीक हूं ।मुझे क्या हुआ???
घर पर चीनी नहीं थी ।तो अपने गांव की जो आदत है कि पड़ोसी से एक कटोरी शक्कर तो ले ही सकते हैं। तो मैं यहां लेने आ गई ।
तो इन्होंने मुझसे बातें की। बातों -बातों में पता चला कि ये भी यहां पर अपने बेटे- बहू के साथ रहती है।
इनकी बहू ने मुझसे कहा कि मै आज इनके साथ चाय पी लू ।इसलिए मै यही बैठ गई।
शायद फोन घर पर भूल गई। इसलिए पता नहीं चला।
प्रिया और अमित दोनों को इस बात की सुकून था कि मां ठीक है ।
तभी पड़ोस की आंटी ने कहा ..
आज जब तुम्हारी मम्मी मेरे घर आई, तो मुझे ऐसा लगा मानो मेरे गांव की कोई सहेली आ गई हो। इसलिए मैंने उनको यहां बैठा लिया ।आशा करती हूं, तुमको बुरा नहीं लगा होगा ।
अमित ने कहा बुरा लगने की कोई बात नहीं है ।हम भी छोटे शहरों में ही रहते थे और वहां हम पड़ोसी के घर पर कभी भी चले जाते थे। उनके साथ खाना खा लिया करते थे।एक दूसरे की मदद करते थे। यही तो अपनापन लगता है।
पर हम यहां आए तो मुझे लगा कि पता नहीं यहां के तौर तरीके अलग होंगे। इसलिए मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करता था।
मम्मी की एक कटोरी शक्कर ने देखिए हमको मिलवा दिया।पड़ोसियों से अपनेपन और प्रेम का रिश्ता तो रखना ही चाहिए।
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(इस रचना को अपना समय देने के लिए धन्यवाद!
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Bahot achcha laga padh ke :-) main Mumbai aur Delhi jaise bade shehero main pali-badi hu aur saubhagya se humesha bahot achche padosi mile hai. Bahot aana-jana laga rehta tha, sabhi tyohaar hum milke maanatey the, cricket match milkar dekhtey, power cut hone par antakshari kheltey! :-)) best of all humari pados ki aunty ne kabhi humari pasand ki sabzi ya nashta banaya ho toh humey jaroor bhijvaati aur Meri maa bhi yaad se unkey pasand ki dishes banakar deti.
ReplyDeleteThanks
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