आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार !
जो भी इस लेख को पढ़ रहा है, उसे इस विचित्र से शीर्षक को पढ़कर, इस लेख को पढ़ने की इच्छा हुई होगी।:)
आप सभी ने गौर किया होगा कि अक्सर भिखारी या भिक्षुक जब भी मांगते हैं तो कहते हैं ....'भगवान आपका भला करेगा, कुछ खाने के लिए दे दीजिए।'
भगवान आपको बहुत देगा एक गरीब की मदद करिए ,भगवान आपकी झोली भर देगा ।
मेरे मन में यही सवाल आता था कि यदि मेरे लिए यह भिक्षुक उस भगवान से दुआ करता है तो सीधे-सीधे वह भगवान से खुद के लिए क्यों नहीं मांग लेता???
हमसे दो रुपए मांगता है और हमें दुआ देता है कि हमें भगवान दस दें ।यह कुछ अचरज भरा लगता था। लेकिन कहते हैं ना, कभी-कभी कुछ सवालों के जवाब आपको उस समय नहीं मिलते, लेकिन आपके अनुभव आपको उस सवाल का जवाब जरूर दे देते हैं।
मैं भी आप सभी के साथ मेरे अनुभव सांझा करना चाहती हूं ।अक्सर ऐसा होता है कि जब किसी के दुख को देखकर मेरे दिल को दुख पहुंचता है ,उनके घर आई हुई परेशानी देख मुझे बहुत बेचैनी होती है तो मैं उनके लिए दुआ करती हूं। कभी-कभी व्रत ,उपवास भी कर लेती ...और चमत्कार देखिए कि उनकी समस्या भी हल हो जाती ।
अभी कुछ दिन पहले ही मैंने मेरी सहेली जिसका बेटा दसवीं कक्षा का विद्यार्थी था, उसके लिए एक मुराद मांगी थी कि वह अच्छे नंबरों से पास हो जाए और ईश्वर ने दुआ कबूल कर ली और बेटा अच्छे नंबरों से पास भी हो गया। तब मुझे यह लगा कि किसी और के लिए दुआ, प्रार्थना करने से वह जल्दी कबूल होती है और आप जो चाहते हैं जिसकी आपने कभी कोई दुआ भी नहीं की, वह भी कबूल हो जाती है।
ईश्वर सब कुछ जानता है ,समझता है, देखता है ,परखता है और अच्छे कर्मों का सदैव अच्छा फल भी देता है ।
जिस दिन मेरी सहेली का बेटा अच्छे नंबरों से पास हुआ उसी दिन मेरी बहुत दिनों की तमन्ना भी पूरी हो गई। जब मैंने अपने अंतर्मन से पूछा ऐसा कैसे हुआ???
तो ऐसा लगा ईश्वर सच में कह रहे हो दूसरों के लिए अच्छा सोचना, दूसरों के लिए अच्छा करना हमेशा हमारे ही पक्ष में होता है।
कहते हैं भगवान कभी नहीं चाहते कि उनके भक्त घंटो तक उनकी सेवा करते रहे, उनकी आराधना ,उनकी पूजा करते रहे ।ईश्वर चाहता है कि इंसान ईश्वर पर विश्वास करें ।अच्छे कर्म कर दूसरों की मदद करें। परोपकार करें ।गरीबो की मदद करें ।मनुष्य के मन में सेवा, करुणा और परोपकार की भावना होनी चाहिए ।बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद करना ही मानवधर्म है।
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