पारूल और विजय की शादी की सालगिरह थी और आज पारुल का जन्मदिन भी था। यानी कि पारुल के लिए यह दोहरी खुशी का दिन था। पारुल हर साल इस दिन को बहुत ही अच्छे से मानती थी।
पूरे साल वह इस दिन का इंतजार रहता थी। एक तो जन्मदिन और दूसरे शादी की सालगिरह ,तो कौन इस दिन खुश नहीं होगा।
सुबह होते ही पारुल और विजय को बधाई फोन आना शुरू हो जाते ।दोस्तों के ,रिश्तेदारों के ,मम्मी -पापा के ,भाई बहनों के, ऑफिस में काम करने वाले सहकर्मियों के ।
पारुल सबको उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देती ।बेशक सारा दिन फोन पर ही निकल जाया करता। बहुत अच्छा लगता था ।पूरे साल में इस दिन सभी से बात होती थी ।
जहां पुराने दोस्त उसे यह शुभकामनाएं देते कि 'पारुल बस तेरे जीवन में हमेशा खुशियां ही खुशियां हो ,अब तक तेरा जीवन जितना अच्छे से निकला है, आगे वाला जीवन और भी अच्छा हो। तुझे जो चाहिए वह तुझे मिले।'
कुछ रिश्तेदार ऐसे होते थे जो सिर्फ यह कहते.... 'कांग्रेचुलेशन और बाकी सब ठीक है ?क्या गिफ्ट मिला? इतना कहकर वह अपना शुभकामनाएं देने का फर्ज निभा देते थे।
कुछ दोस्त ऐसे भी थे जो छेड़ते हुए कहते ' क्या मैडम.... कितने साल निकाल लिए ?चालीस पार कर गई अब तो बुढ़ापा शुरू हो गया।'
कुछ लोग ऐसे भी थे जो शादी की सालगिरह पर बधाई देते हुए कहते ...'यह बताइए कौन किसे झेल रहा है? ' 'पारुल तो है ही ऐसी, बस उसका पति उसे झेल रहा होगा।' और साथ साथ उनकी व्यंगात्मक हसी ।सचमुच तब जवाब में क्या कहा जाए ये पारुल को समझ नहीं आता था।
मम्मी -पापा ,सास -ससुर कहते ....'बेटा आने वाले समय के लिए दिल से हमारा ,तुम दोनों को आशीर्वाद ।
वे कहते...' तुम दोनों हमेशा एक दूसरे के साथ रहो और हमेशा हंसते हंसते जीवन के हर एक दिन को आनंद से मनाओ ।'
लेकिन ऐसे लोगों का क्या जो किसी के इतने शुभ दिन पर ऐसे ताने मारते हैं कि वह चुभने लगते हैं ।
इसलिए जब भी आप किसी को उसके जन्मदिन या शादी की सालगिरह पर शुभकामनाएं दे तो अच्छे शब्दों का प्रयोग करें ।कभी यह न कहें ' चलो जिंदगी का एक साल और निपट गया ',
' बुढ़ापा शुरू हो गया। '
'ना जाने और कितना एक दूसरे को और झेलना है?'
आपकी शुभकमनाओं में प्यार होना चाहिए तंस नहीं।
(इस लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत आभार)
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