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काले पन्ने फाड़ दिए..

मिश्रा परिवार की बड़ी बहू ,देवर और  ननद की लाडली भाभी, राजीव की जीवनसंगिनी , एक मासूम से बच्चे की मा ,नर्सरी में पढ़ाने वाली प्यारी सी प्रियंका टीचर... अपनी छोटी सी जिंदगी मे बहुत खुश थी ।

ससुराल में उसे इतना प्यार ,सम्मान मिला, जिसके सपने हर एक लड़की देखती है ।जहां उसे बड़ी बहू होने के नाते परिवार के हर छोटे-बड़े निर्णय लेने का हक मिला ।वहीं राजीव ने उसे नौकरी करने और अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत दी। आज प्रियंका अपनी इस जिंदगी से इतनी खुश थी जैसे मानो कभी कुछ हुआ ही नहीं था।

 लेकिन ऐसा नहीं था....

 आज से 5 साल पहले प्रियंका इस शादी के बिल्कुल खिलाफ थी । यह शादी उसके लिए मरने से भी बदतर थी। ना  राजीव  उसे पसंद था, ना राजीव के परिवार वाले।

 उसे शादी नाम से ही नफरत हो गई थी ।परिवार वालों ने प्रियंका को बहुत प्यार से समझाया उसे मनाया तब कहीं जाकर प्रियंका  शादी करने के लिए तैयार हुई थी।

प्रियंका के सास- ससुर  प्रियंका को इतना प्यार करते , उसे  सम्मान देते और राजीव उसे पलकों पर रखता तो फिर क्यों न प्रियंका अपने अतीत को भूल जाती।

 आज अलमारी साफ करते हुए उसके हाथ में एक छोटी सी डिब्बी आ गई । जिसमें एक बटन था जो शशांक ने उसे अपनी निशानी के रूप में दिया था।वो बटन  उसे अतीत के  काले पन्नों को याद दिला गया।

 प्रियंका को याद आया वह पल जब वह शशांक को चाहती थी। लेकिन शशांक ने प्रियंका को सिर्फ उसका आकर्षण बता कर उसे छोड़ दिया था ।जहां प्रियंका शशांक के साथ अपना जीवन देख रही थी, वहां शशांक सिर्फ उसे कुछ समय के लिए दोस्ती करके अपना समय बिताना कह रहा था ।

एक लड़की के लिए वह समय बहुत मुश्किल हो जाता है जब वह किसी को अपना सब -कुछ समझ ले। अपना जीवन उसके साथ देखने लगे और वह उससे कहें... मैंने कभी ऐसा चाहा ही नहीं कि मैं तुमसे शादी कर अपना जीवन बिताऊ।

 तुम एक सिर्फ दोस्त हो..

प्रियंका तिल - तिल मर रही थी। तब उसके लिए राजीव का रिश्ता आया था ।मम्मी पापा के कहने पर उसने राजीव से शादी की।

 आज उस बटन को देखते ही उसे याद आया कि  उसने शादी के एक महीने तक अपनी आंखों के करीब रखा। रोज उसे देखती और शशांक को याद करती ।

लेकिन धीरे-धीरे परिवार का प्यार उसे शशांक की यादों से दूर ले गया ।

तभी राजीव कमरे में आया उसने पूछा ...

'प्रियंका यह क्या कर रही हो????'

 प्रियंका हंसते हुए बोली...' कुछ नहीं अलमारी में थोड़ा कचरा हो गया था बस कचरा साफ कर रही हूं ।'

और वह बटन की डिबिया उसने डस्टबिन में डाल दी। सचमुच अतीत के कुछ काले पन्ने  यदि फाड़ दिए जाए ,उन्हें भूल जाए  तो जिंदगी सुखमय हो जाती है।



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