अभी जब अप्रैल का महीना चल रहा है ,तो मुझे याद आती है मेरी गोद भराई।
अप्रैल के ही महीने में आज से 15 साल पहले मेरी गोद भराई की गई थी। मेरे ससुराल वाले और मायके वाले सभी बहुत खुश थे ।
गोद भराई की हर एक रस्म को बहुत अच्छे से अदा किया गया था ।मेरे मायके से मेरे लिए एक लाल रंग की सितारे जड़ी हुई साडी आई थी। जिसे पहनना उस गर्मी के मौसम में एक बहुत बड़ा काम था मेरे लिए। फिर भी मैंने उस साडी को पहनकर सारी रस्में पूरी की।
आज भी उस साड़ी को ,मैं जब देखती हूं तो खुशी से झूम उठती हूं ।उस साड़ी में तस्वीरो को देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है ।
हमारे यहां गोद भराई में देवी जी की पूजा की जाती है । जिसकी गोद भराई की जा रही है उसे सारी रात देवी जी की पूजा के मंडप के सामने ही रहना पड़ता है ।दूसरे दिन जब उस पूजा का उद्यापन होता , तभी वह साड़ी बदल सकती है ।
यह सोच कर दो मैं बुरी तरह से डर गई थी । तापमान जहां 40 को क्रॉस कर गया था ,वही वह सितारे जड़ी साडी में मै सारी रात कैसे रहूंगी???मेरे पति भी परेशान और मैं भी बहुत परेशान थी।
बाकी सभी लोगों का मानना था कि यह रिवाज है और इसे ऐसे ही होना चाहिए ।
मुझे बहुत असुविधा हो रही थी लेकिन मैं कुछ कह नहीं पा रही थी किसी से । मेरी सास को मेरी असुविधा, मेरे कष्ट का एहसास हुआ।
उन्होंने मेरे पास आकर मुझसे कहा कि 'माना की गोद भराई की हर रसम को पूरा करना बहुत जरूरी है।इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हे कोई तकलीफ हो।'
'तुम्हें इस समय शारीरिक आराम की जरूरत है और सारी रात यहां पर तुम्हें आराम नहीं मिलेगा। इस अवस्था में जब तुम्हारे अंदर एक नई जान, नई जिंदगी पल रही है , हम सब के लिए जरूरी है कि सबसे पहले तुम्हारा ध्यान रखा जाए ।तो तुम अंदर जाकर आराम से पलंग पर सो सकती हो।'
मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं था क्योंकि मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरी सांस मुझसे ऐसा कुछ कहेगी।
लेकिन उन्होंने कहा समय के साथ-साथ कुछ रीति-रिवाजों में थोडा बदलाव आ जाए तो कुछ बुरा नहीं होता।
मैं जानती हूं तुम्हारा इस तरह से पूरी रात इस साडी में रहना कष्टदायक होगा ।
उनके यह शब्द मेरे लिए मानो भगवान की वाणी थे, क्योंकि भगवान ने मेरी बात सुन ली।
उनके इस कदम से काफी लोग नाराज भी थे ।लेकिन उन्होंने किसी की चिंता नहीं की ।उन्होंने कहा .. बेहतर है कि हम बहू के और उसके बच्चे के बारे में सोचें और रहा सवाल भगवान के मंडप के सामने रहने का तो हम सब यहां पर तो हैं ही।
मेरे मन में उनके लिए इज्जत कई गुना बढ़ गई। दूसरे दिन पंडित जी आए और विधि संपूर्ण की ।
मैंने मेरी सास के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उनका धन्यवाद किया । तब उन्होंने कहा कुछ रीति -रिवाज समय के हिसाब से बदल दिए जाएं तो उसमें कोई बुराई नहीं, यह समय की मांग होती है ।उन्होंने मुझे एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने का आशीर्वाद दिया।
सचमुच .....सास हो तो ऐसी!
(अपने अनुभव आप मुझे बताए।)

True
ReplyDeleteHetal
Yeah
DeleteWow! How thoughtful of her. May God bless her with health and happiness. 🙏
ReplyDeleteThank you so much.
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