दिनेश ,रंजीता से बेइंतहा मोहब्बत करता था। लेकिन कभी अपने प्रेम का इजहार ना कर पाया । ऐसा नहीं था कि दिनेश को मौका नहीं मिला, लेकिन कहते हैं ना कि प्यार का इजहार करना इतना आसान भी नहीं होता।
ऐसा नहीं था कि रंजीता को अपने प्यार के बारे में बताने के लिए दिनेश ने कभी कोई कोशिश नहीं की ।कभी जब रंजीता कॉलेज नहीं आती ,तो दिनेश अपने नोट्स उसे जा कर दे आता था ।आते-जाते जब रंजीता को रिक्शा नहीं मिलता तो दिनेश ही तो था ,जो उसे घर तक छोड़ा आता था ।
रंजीता को उसके जन्मदिन पर सरप्राइज पार्टी भी तो दिनेश ने ही दी थी । पर रंजीता कुछ भी नहीं समझ पाई। उसे तो लगता था कि दिनेश सिर्फ एक उसका अच्छा दोस्त है ।उससे ज्यादा कुछ भी नहीं।
दिनेश के दोस्तों ने भी उसे कई बार कहा था, रंजीता से तुम अपने मन की बात कह दो ।ऐसा ना हो कि बाद में तुम पछताते रह जाओ।
दिनेश ने अपने प्यार का इजहार करने के लिए सैकड़ों खत लिखे, लेकिन कभी उन खतो को रंजीता को ना दे पाया ।उसे डर था कि रंजीता उसके प्यार को ना समझ सके और उसे ठुकरा दे तो???
आज पूरे 5 साल बाद शिव जी के उसी मंदिर पर जहां रंजीता और दिनेश अक्सर परीक्षा के पहले भगवान का आशीर्वाद लेने आया करते थे दिनेश आया हुआ था ।
उसने देखा वह लाल रंग की साड़ी पहने हुए ,माथे पर छोटी सी बिंदी लगाए हुए ,हाथों में ढेर सारी लाल चूड़ियां पहने हुए रंजीता मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रही थी ।दिनेश सिर्फ उसे देखता रहा ।रंजीता उसके पास आई और कहने लगी...' अरे दिनेश.. तुम ! यहां ???आज कौन सी परीक्षा है??? जो तुम इस मंदिर में भगवान के आशीर्वाद लेने आए हो ।
दिनेश बोला....' अरे !ऐसी कोई बात नहीं ।मैं तो बस यूं ही यहां आया था। तुम बताओ तुम कैसी हो??? वैसे तुम बहुत सुंदर लग रही हो ।
रंजीता खिलखिला कर हंसने लगी। कहने लगी तुम्हारी बस यही आदत है मेरी हमेशा तारीफ ही करते रहते हो।
तभी दिनेश की नजर एक छोटे से बच्चे पर पडी। उस बच्चे ने रंजीता का हाथ पकड़कर पूछा....' मां! ये अंकल कौन है ??'
रंजीता ने कहा ....' बेटा !यह तुम्हारे दिनेश मामा है ।तुम इनके साथ खेल सकते हो। दिनेश मामा तुम्हें पूरा शहर दिखाएंगे । तुम्हें इनके साथ बहुत मजा आएगा। रंजीता ने दिनेश की तरफ देखते हुए कहा ....'दिनेश मामा !ठीक कहा ना मैंने??
(आप सभी पाठकों का बहुत बहुत धन्यवाद।)

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