सेजल की २४ वर्ष में शादी तय हो गई।सब कुछ अच्छा था ।खासकर लड़का अतुल बहुत ही हैंडसम था।सेजल का सपना था कि उसे हीरो जैसा वर मिले।इसलिए उसने भी हामी भर दी थी।
शादी के लिए अभी ६ महीने बाकी थे। उस बीच सेजल और अतुल का मिलना- मिलाना चालू था। सुनहरे दिनों का वे बहुत आनंद ले रहे थे।अतुल, सेजल को महंगे महंगे उपहार देता था।जो सेजल को अच्छे लगने लगे।
उसने अपनी मां से कहा...' अब मुझे ऐसा लग रहा है, कि मुझे भी अतुल को कुछ महंगा उपहार देना चाहिए।'
मा ने कहा....' उपहार देने में कोई परेशानी नहीं, किन्तु महंगा होना जरूरी नहीं होना चाहिए।'
सेजल गुस्से से बोली क्या....' मा, तुम हमेशा कंजूसी की बाते करती हो।मेरा उपहार महंगा होगा तो ससुराल में मेरी इज्जत होगी।'
सेजल ने एक ना सुनी और महंगा उपहार अतुल को दे दिया।
शादी का दिन भी दिन आ गया।धूमधाम से दोनों की शादी हुई।
अतुल सेजल हनीमून के लिए विदेश गए।सेजल तो खुशी से सातवे आसमान पर थी।उसे लगा की उसके सारे सपने पूरे हो गए।
ससुराल आई तो धीरे- धीरे उसे वास्तविकता पता चली। अतुल और उसके घर वाले सेजल के मायके वालों का छोटा -मोटा मज़ाक बनाते। जैसे सेजल के भाई को कभी जोकर बोलते, कभी कहते कि किसी को कोई अकल नहीं।
सेजल उनका विरोध ना करती ।बल्कि अपने भाई को बोलती की उसे कैसे व्यवहार करना चाहिए। सेजल के विरोध ना करने के कारण, अतुल की हिम्मत बढ़ गई।
जब भी लेन- देन की बात होती, सेजल अपने ही मायके वालों का दोष निकालते हुए ,मायके वालों से कहती कि वे अपनी बेटी को कुछ ठीक से नही देते। उसकी वजह से ससुराल में उसकी इज्जत नहीं होती ।
जब अतुल को ऐसा पता चला तो अतुल को यह बात पूरी तरह समझ में आ गई कि सेजल अपने मायके वालों का तो सम्मान करती ही नहीं। उसका फायदा अतुल और उसके परिवार ने बखूबी उठाया।
सेजल के मायके वालों ने सेजल के घर आना लगभग बंद कर दिया था और जब आना पड़ता तो सेजल उन्हें निर्देश दे देती , किस बात पर हंसना है ?किस बात पर नहीं? कैसे कपड़े पहने हैं ? क्या बात करनी है? ।
धीरे -धीरे सेजल और अतुल के बीच के संबंधों में कड़वाहट आने लगी।
कभी तू -तू ,मैं- मैं हो जाती, तो कभी पैसों को लेकर झगड़ा हो जाता ।
सेजल जब भी कहती कि मैं अपने मम्मी पापा को बताऊंगी तो अतुल कहता अच्छा तुम् उन्हें क्या बताओगी??? क्या कर लेंगे मेरा ???तुम् खुद ही अपने भाई ,अपने माता -पिता का अपमान करती हो।
सेजल को अनुभव हो चुका था, कि उसकी छोटी सी गलती उस पर ही भारी पड़ी ।
जब पहली बार अतुल ने उसके भाई का मजाक बनाया था तब वह बता देती कि वह अपने मायके वालों का अपमान नहीं सहन करेगी। तो शायद बात नहीं बिगड़ती ।
एक लड़की के लिए जितना उसका ससुराल महत्वपूर्ण है ,मायके का मान भी उसके लिए उतना ही मायने रखना चाहिये।कभी भी अपने ससुराल वालों को इस बात की इजाजत ना दें कि वे आपके मायके वालों का मजाक उड़ा सके ।अच्छे शब्दों में या कभी जरूरत पड़े तो कड़े शब्दों में वही उन्हें रोक दें और उन्हें बताएं कि बेशक शादी करके अपने ससुराल आई हैं। बेशक उसके लिए ससुराल की इज्जत करना उसका धर्म है।
लेकिन इसके लिए वह अपने मायके वालों का अपमान कभी सहन नहीं करेगी। ससुराल वालों की मांगो के सामने कभी भी मायके वालों को इस बात के लिए मजबूर ना करें कि वह अपनी मर्जी के खिलाफ जाकर ससुराल वालों के लिए तोहफा भेजे।अपने सही शब्दों के चुनाव से ससुराल वालों को ये जता दे कि आप अपने मायके वालों का अपमान नहीं सहन करेगी।ससुराल वालों को ये जताना भी जरूरी है कि आपके मायके वाले उनकी मर्जी से तोहफे देंगे नाकी ससुराल वालों की मर्जी से।मायके वालों का सदा सम्मान करें।उनका सदा मान बना रहे ये आपके हाथों में है।

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