संगीता पढ़ी- लिखी, समझदार ,होशियार ,आत्मनिर्भर लड़की थी। अपने ससुराल और मायके में उसने अच्छा सामंजस्य बना रखा हुआ था ।जहां ससुराल में उसकी बहुत पूछ- परख होती ,वहीं मायके में भी उसके मम्मी- पापा ,भाई -भाभी उसका सम्मान करते।
संगीता के पिता ने एक दिन संगीता को अपने घर बुलाया और संगीता से कहा कि वह अपनी जायदाद का बंटवारा कर देना चाहते हैं। रमन और संगीता के बीच ।
संगीता ने कहा ....'अभी कोई जरूरत नहीं है इस बात की ।आप क्यों ऐसा कर रहे हैं????
पिताजी ने कहा..' नहीं संगीता मेरे रहते यदि मैं यह कर दूं, तो ज्यादा अच्छा है। बाद में मैं नहीं चाहता तुम दोनों के बीच में कुछ मनमुटाव हो ।
संगीता ने हामी भर दी। पिताजी ने अपनी जायदाद का आधा हिस्सा संगीता के नाम और आधा अपने बेटे के नाम कर दिया। अपने पास कुछ भी नहीं रखा ।धीरे -धीरे पिताजी की तबीयत थोड़ी खराब होने लगी ।रमन उनका पूरा ध्यान रखता रमन की पत्नी भी उनकी अच्छी तरह सेवा करती।
संगीता ने मायके आना थोड़ा कम कर दिया था क्योंकि जब भी वह मायके आती तो माता-पिता बीमार दिखते और भाई -भाभी ,माता -पिता की सेवा में रहते हैं। माता -पिता को संगीता का व्यवहार समझ नहीं आया ।
परिस्थिति और बिगड़ती चली गई । पिताजी को बड़ी बीमारी ने घेर लिया और उसकी इलाज में काफी सारे पैसे चले गए। तब रमन ने संगीता को फोन करके यह बात बताई ।
संगीता घर आ गई और उसने कहा...' पापा की जिम्मेदारी तुम्हारी है। तुम बेटे हो, तुमको सब कुछ देखना है।'
मैं अपना ससुराल, अपना घर- बार छोड़कर यहां उनकी सेवा करने नहीं बैठ सकती।
रमन ने कहा...' हां दीदी मैं जानता हूं ,लेकिन अभी मुझे कुछ पैसे चाहिए पापा का इलाज जरूरी है।'
संगीता बोली ....वाह!!! बेटे तुम हो ,और बेटी से पैसे मांग रहे हो, शर्म नहीं आती ???
पापा की जिम्मेदारी सिर्फ तुम्हारी है ।
तभी मां आई। मां ने संगीता के चेहरे पर एक जोर का तमाचा मारा ...
और कहां.... संगीता जब पिता की प्रॉपर्टी में बटवारा हो रहा था तब तुमने एक बार भी नहीं कहा कि मैं अपने ससुराल में सुखी हूं ,संपन्न हूं। आप मेरा हिस्सा अपने पास ही रखिए कभी काम आएगा ।तब तो तुम्हारे मुंह से कुछ भी नहीं निकला। आज जब पैसे की जरूरत है तो तुम फर्ज नहीं निभाना चाहती।
संगीता... सुनो ...यदि एक लड़की को अपने पिता के पैसों में हक चाहिए ,तो पिता और माता की सेवा करने का फर्ज भी निभाना आना चाहिए ।
Yes, absolutely right!
ReplyDeleteThx for reading
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