मुंबई शहर की खूबसूरत सोसायटी जिसमें ५00 से ज्यादा लोग रहा करते थे ।वहां शाम के 5:30 बजते ही सोसायटी की महिलाएं जो करीब 55 से 60 वर्ष की थी ,नीचे उस सोसायटी के बगीचे में मिलती । बातें पहले कैसी हो? क्या चल रहा है??? से शुरू होती लेकिन फिर बातें बढ़ने लगती और बहू की बुराइयों से खत्म होती ।
ऐसा लगता है मानो वे एक दूसरे से कोई प्रतियोगिता कर रहीं हो , कि उनकी बहू दूसरे की बहू से ज्यादा खराब है ।
रोज उन्हें अपनी बहू में कोई ना कोई खराबी नजर आती ।इस बात का ढिंढोरा सबके बीच जोर जोर से पीटती।
यह सिलसिला चलता रहा ।ऐसा नहीं था कि बहूओ को इस बारे में जानकारी नहीं थी ,लेकिन बहुएं इसी बात से खुश थी कि शाम के कुछ घंटे तो सास की किटकिट से मुक्ति पाती थी।
1 दिन सोसाइटी में एक नया परिवार रहने आया। उस परिवार में भी सास -बहू की जोड़ी थी ।दो-तीन दिन उस परिवार ने अपना सामान जमाया और सोसाइटी में घुलने मिलने लगे ।
उस परिवार की सास रंजना जी ने देखा कि उनकी उम्र की काफी महिलाएं बगीची में बैठा करती हैं ।उन्हें जानकर खुशी हुई ।एक दिन उन्होंने स्वयं ही पहल की और उनके साथ जा बैठी। शुरू में सब कुछ ठीक लगा ।धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि यह सभी एक ही तरह की बातें रोज करते हैं।
उन सभी का एक ही मुद्दा होता है अपनी बहुओं की बुराई करना। रंजना जी को यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आई जब चार-पांच दिन ऐसा हुआ तो अगले दिन रंजना जी ने एक बात तय कर ली कि वे इस सिलसिले को विराम देंगी।
एक शाम रंजना जी महिलाओं के साथ बैठी थी ।जैसे ही किसी ने अपनी बहू की बुराई करना शुरू किया तभी रंजना जी ने उन्हें रोका ,उन्होंने कहा मैं आपसे एक बात कहूं...
आप बुरा ना माने तो .... अपने ही परिवार के किसी सदस्य की बुराई इस तरह सरेआम कर रहे हैं क्या आपको ऐसा करने में आनंद मिल रहा है??????
आप यह बात सोचिए कि आपकी बेटी की सास इस तरह उसकी बुराई सरेआम करें तो???? आपको कैसा लगेगा ????
या आपकी बहू की मां आपकी बुराई ,आपके बेटे की बुराई अपने मोहल्ले में करती फिरे तो आपको कैसा लगेगा????
आप यह क्यों नहीं मानती कि आपकी बहू आपके परिवार का सदस्य है ।आपका परिवार उसकी वजह से ही पूरा है।
तो फिर उसकी बुराई करने का क्या वजह है ????
परिवार में हो सकता है लोगों के विचार ना मिले.... तो क्या इस समस्या का एक ही हल है उसकी बुराई करें ????
बिल्कुल नहीं ......
जब रंजना जी यह सब बोल रही थी सभी महिलाओं के चेहरे झुके हुए थे ।लेकिन रंजना जी चुप नहीं हुई ।उन्होंने कहा मेरी बहू भी है ।वह भी अपना परिवार छोड़कर मेरे घर आई है ।लेकिन अब यह घर उसका भी है।
हां उसका रहन-सहन, उसकी सोच हमसे अलग है।
उसका खानपान का तरीका हमसे अलग है।
तो क्या हम थोड़ा उसके हिसाब से अपने जीवन में बदलाव नहीं ला सकते ??
क्या बहू ही हमेशा खुद में बदलाव लाए ???
मैं आप सब से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि अपनी बहू को परिवार सदस्य मानते हुए उसकी हर छोटी बड़ी बात को समझने की कोशिश तो करें ।
हो सकता है आप जैसे खाना बनाते हैं, उसका तरीका अलग हो पर आपसे बेहतर हो। तो क्यों नहीं तारीफ के दो बोल बोल दिया जाए। हो सकता है मॉडर्न कपड़े पहनना पसंद हो ।क्यों नहीं ????समय बदल रहा है ।आपको उसका साथ देना चाहिए ।ताकि आपके घर में रौनक आ जाए ।आपका घर खुशियों से भर उठे।
थोड़ी आप उसकी मदद कीजिए ।थोड़ी वो मदद करेगी ।
दो महिलाएं आपस में क्या चाहती हैं???
तारीफ के दो बोल बोल दिए जाए, मदद कर दी जाए, एक दूसरे का साथ दिया जाए।
क्या ऐसा करना इतना मुश्किल है आप सबके लिए ?????
सभी ने कहा कि ........ उन्होंने अब तक जो किया वह सही नहीं था।
रंजना जी ने कहा तो फिर ठीक है आज से यह तय करें कि हम सोसायटी के बगीचे में आएंगे ,योगा अभ्यास करेंगे, हम खेलेंगे, हम एक दूसरे से नए-नए व्यंजन बनाने की विधियां शेयर करेंगे ,हम स्वस्थ रहने के उपाय को एक दूसरे के साथ बताएंगे और सबसे बड़ी बात इस जगह एक बोर्ड लगा दिया जाएगा "बहू की बुराइयां करना निषेध है"
सभी खिलखिला कर हंस पड़े और अगले दिन से ऐसा ही हुआ सभी योगा करते ।आपस में हंसी मजाक वाली बातें करते और जब घर जाते तो बहुत खुश हो कर घर जाते ।जिसकी वजह से घर का माहौल और भी अच्छा हो जाता।
Nice
ReplyDeleteHey thx vibhuti
DeleteVery nice! 👍
ReplyDeleteThx dear
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