आप सभी मेरा प्यार भरा नमस्कार........
आजकल महिलाओं को खुद को होममेकर या हाउसवाइफ कहना चुभता है।
ऐसा नहीं कि वो अपनी जिंदगी से खुश नहीं है ,बल्कि वो बहुत खुश है।
परेशान तो वो तब हो जाती है ,जब कोई तीसरा आके उन्हें पूछता है क्या करती है आप?????
तब ऐसा लगता है मानो वो इसलिए ये सवाल कर रहा है क्योंकि हमारा जवाब ये तय करेगा कि हमें कितना सम्मान दिया जाए?????
जिंदगी में डिप्रेशन तब शुरू होता है जब कोई आके ये ताना दे जाता है कि ओह इतना पढ़ी लिखी हो घर पे बैठी हो???????
एक औरत जो अपने अस्तित्व को ले के कभी परेशान नहीं थी।अचानक उसे अपना अस्तिव खतरे में दिखने लगता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आजकल पढ़ाई को सिर्फ पैसे से तोला जाता है।
यदि आप पढ़ी लिखी है, लेकिन आप कुछ पैसे ना कमाए तो आपकी पढ़ाई व्यर्थ है ।ऐसा आपको लोग यकीन दिला देते है।
आपके द्वारा किए जाने वाले सारे काम एक कामवाली के काम है ,ऐसा लोग आपके कानों में बार-बार डालते रहते हैं।हालांकि आपके पति और आपके बच्चों ने कभी ऐसी कोई बात आप से ना की होगी।
अब तक जो महिला अपने परिवार के साथ खुश थी, जिसने देवी रूप लेकर एक बच्चे को जन्म दिया, अन्नपूर्णा बनकर परिवार को भोजन कराती ,सरस्वती बनकर अपने बच्चो को अच्छे श्लोक सिखाती उन्हें अच्चे संस्कार देती थी।
आज उसे सब बेमानी लगने लगा।
क्यों??????????
क्योंकि वो कुछ कमाती नहीं।
एक हाउसवाइफ या होममेकर होना शर्म की बात नहीं बल्कि ये तो एक निजी निर्णय है जो एक महिला बहुत सोच समझ कर लेती है।
हर एक हाउसवाइफ को खुद पर गर्व होना चाहिए।
हर एक हाउसवाइफ को खुद पर गर्व होना चाहिए।
क्यों वो किसी भी कामकाजी महिला से खुद को कम आँके????
हर एक महिला अपने घर ,अपने काम के साथ पूरी तरह इमानदार होती है ।चाहे वह कामकाजी महिला हो या घरेलू।
इसलिए मुझे लगता है कि किसी भी होममेकर को अपने ऊपर शर्म नहीं बल्कि गर्व करना चाहिए ।
बेशक अपनी जिंदगी के किसी भी पडाव पर वह
बाहर जाकर काम कर सकती है ,लेकिन इसका निर्णय वह स्वयं लेगी कि कब और कैसे उसे अपना कैरियर बनाना है????
बाहर जाकर काम कर सकती है ,लेकिन इसका निर्णय वह स्वयं लेगी कि कब और कैसे उसे अपना कैरियर बनाना है????
और कोई तीसरा क्यों आकर ,आपके अस्तित्व पर सवाल करें??????
आपकी बुद्धि ,आपका विवेक ,आपका ज्ञान इस बात से तो बिल्कुल भी नहीं आंका जा सकता कि आप बाहर जाकर पैसे कमा सकती हैं या घर पर रहती हैं??????
इसलिए महिलाओं को जिस तरह दो कैटेगरी में बांट दिया गया है... वर्किंग और हाउसवाइफ ...इसे मिटाने की बहुत ज्यादा जरूरत है, क्योंकि दोनों ही अपनी -अपनी जगह सशक्त है।
जरूरत तो सिर्फ इस बात की है कि क्या वह अपनी उस परिस्थिति से खुश है या नहीं????
जरूरत तो सिर्फ इस बात की है कि क्या वह अपनी उस परिस्थिति से खुश है या नहीं????

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