'कितनी बार कहा है ...कितनी बार तुम्हें समझाया है...
मां !मुझे शादी नाम से नफरत है ।'
'अब मुझसे कभी तुम शादी करने के लिए प्लीज मत कहना.... क्योंकि मैं दोबारा वही गलती नहीं करना चाहती ।'
संगीता ने बहुत ही गुस्से में यह बात अपनी मा से कहीं।
मां उसके लिए शादी का एक रिश्ता लेकर आईं थीं ।
संगीता की मां ने कहा ....' ऐसे नहीं होता.... माना कि भगवान है तेरे साथ एक बार बुरा किया ।पर जरूरी नहीं कि ऐसा दुबारा हो ।यह रिश्ता बहुत अच्छा है ।तेरे चाचाजी कह रहे थे कि सचमुच बहुत ही अच्छा लड़का है ।वह तुम्हें बहुत प्यार करेगा ।बहुत सुखी रहोगी तुम ।एक बार तुम उससे मिल तो लो ।इस तरह जिद नहीं करते ।'
मां .....मुझे किसी लड़के से नहीं मिलना ।मैं जान चुकी हूं कि हर एक आदमी ,एक औरत को सिर्फ अपने पैरों की जूती समझता है, इससे ज्यादा कुछ भी नहीं। मैं अपनी जिंदगी अब दोबारा नर्क में नहीं डालना चाहती ।मुझे बख्श दो मां ।
मां का दिल मानने को तैयार नहीं। वह फिर से उसके सामने कहने लगी ....'संगीता मैं जानती हूं... धीरज ने जो भी तुम्हारे साथ किया बहुत खराब था ।उसने तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर दी। शादीशुदा होते हुए भी तुमसे शादी की। तुम्हें धोखा दिया हम सब को धोखा दिया।'..... यह कहते-कहते संगीता की मां जोर जोर से रोने लगी।
संगीता ने मां के कंधे पर हाथ रख कर कहा...' अब तुम उस बात को छोड़ क्यों नहीं देती??? उस बात को भूल जाओ और उस आदमी का तुम नाम भी मत लो। जो होना था ,सो हो गया ।मेरी किस्मत में लिखा था। क्या कर सकते हैं???'
तभी अचानक दरवाजे पर घंटी बजी।
संगीता ने अपनी मां को संभालते हुए कहा...' चलो !अब तुम चुप हो जाओ, देखो कोई आया है ।मैं देखती हूं कौन है ?
उसने दरवाजा खोला ।दरवाजा खोलते ही कोई जाना पहचाना सा चेहरा उसके सामने था ।लेकिन उसे याद नहीं आया ।इसलिए उसने आश्चर्य से पूछा ' जी! आप कौन??? किससे मिलना है आपको ???
उस व्यक्ति ने कहा ...'पहचाना नहीं संगीता मुझे ?????
मैं ......आगे वह कुछ कहता....
तभी संगीता को उसकी आवाज सुनकर मानो सब कुछ याद आ गया ।उसने कहा अरे! अजय तुम यहां ????
उसने कहा...' संगीता ... शुक्र है तुमने मुझे पहचान लिया। वरना मैं तो सोच रहा था तुम मुझे भूल ही गई ।'
संगीता ने कहा ....'अरे !अजय तुम्हें कैसे भूल सकती हूं ।'
लेकिन तुम यहां पर कैसे ????
अजय ने कहा ....अरे! तुम्हारे घर पहली बार आया हूं ।चाय पानी नहीं पूछोगी ????
दरवाजे पर ही सारी बातें कर लोगी क्या ???
संगीता ने कहा अरे !हा ....अंदर आओ, तुम बैठो मैं अभी कुछ लेकर आती हूं तुम्हारे लिए ।
उसने आवाज लगाई...' मां....! देखो कौन आया है?
तभी संगीता की मां अंदर से आई।
संगीता की मां को देखते ही अजय ने उनके चरण स्पर्श किए ।संगीता की मां भी उसे पहचान नहीं पाई थी ।अजय ने अपना परिचय स्वयं देते हुए कहा ..'आंटी .. मैं अजय हूं।आपको याद है??? मै और संगीता साथ में ही कॉलेज में थे ।'
संगीता की मां ने उसके सिर पर हाथ रख कर कहा ...'अरे !अजय तू????
तू कैसा है रे ??? कितने साल हो गए??? तेरी मम्मी पापा कैसे हैं ?
'अच्छा हुआ तू आया। अब तू ही संगीता को समझा।'
तूझे तो पता ही है धीरज के साथ शादी करवा कर संगीता की जिंदगी बर्बाद ही गई।
अब एक अच्छा रिश्ता आया है यह है कि मान ही नहीं रही है। तू, उसका दोस्त है ।तू उसे समझाएगा तो वह मान जाएगी। इस लड़की की भी जिंदगी बस जाएगी ।
तभी चाय और बिस्किट लेकर संगीता कमरे में आई। मां को गुस्से से बोली...' फिर से शुरू हो गई मां ....अजय अभी तो आया है'।
अजय ने संगीता से कहा...' कोई बात नहीं संगीता ,आंटी मम्मी के जैसी तो है। यह मैं क्या सुन रहा हूं... आंटी बता रही हैं कि एक अच्छा रिश्ता आया है और तुम मना कर रही हो???
संगीता ने कहा...' अजय... प्लीज मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी है।'
अजय ने संगीता को समझाते हुए कहा .....' जिंदगी में कई बार कड़वे अनुभव हो जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आने वाला हर एक दिन कड़वा या बुरा हो ।तुम्हें अपनी जिंदगी को दूसरा मौका देना ही चाहिए।'
संगीता का गुस्से का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया था ।उसने कहा ....'अच्छा यह बड़ी-बड़ी बातें करना छोड़ो ...।यह बताओ कि क्या तुम्हें मेरे जैसी लड़की जिसका तलाक हो चुका है ,उसके साथ शादी करनी पड़े तो क्या तुम खुशी खुशी उससे शादी करोगे?????'
'मां कह रही है एक अच्छा रिश्ता आया है जबकि वो खुद नहीं जानती कि लड़का कौन है????लेकिन कोई लड़का किसी तलाकशुदा लड़की से आखिर शादी क्यों करेगा?????'
अजय ने कहा...' अरे !तुम उस लड़के से मिल तो लो।'क्या पता तुमको वो पसंद आ जाए।'
संगीता ने कहा ठीक है।
अजय ने संगीता की मा से पूछा...' कि लड़का कौन है? क्या करता है???
मा ने कहा ...'मुझे तो कुछ पता नहीं। संगीता के चाचा ने कहा उनकी नजर में लड़का है इसलिए जब से इस लड़की को माना रही हू।'
अजय ने कहा.. 'ठीक है ...कल मै दोनों की मीटिंग फिक्स कर देता हूं चाचाजी से बात करके।'
मां ने कहा ...' हा... बहुत अच्छा।'
दूसरे दिन शाम ६ बजे संगीता और अजय तय की हुई जगह पर पहुंच गए ।
उसने अजय से पूछा....' कहा है लड़का ?? मै तो उसका नाम भी नहीं जानती।'
अजय ने कहा... अरे! तुम आराम से यहां बैठो।'
'मै अभी आया।'
....तभी चाचाजी वहां पहुंच गए
उन्होंने संगीता को पूछा...' क्यों संगीता लड़के से मिली ???कैसा लगा लड़का ???
संगीता आश्चर्यचकित हो गई उसने कहा....' यहां कोई लड़का नहीं आया चाचा जी अभी तक।'
किससे मिलती ????
आपने ना नाम बताया ...ना उसके बारे में कुछ और जानकारी दी।
चाचा जी अचंभे में पड़ गए उन्होंने कहा ....'क्या बात कर रही हो ???मैंने तो उस लड़के को अभी यहां देखा था।'
क्या वह तुमसे नहीं मिला????
संगीता चिल्ला कर बोली ....'अरे चाचाजी यहां कोई लड़का नहीं...सिर्फ अजय था।'
चाचा जी हंसते हुए बोले ....'वह लड़का अजय ही तो है पगली।'
'क्या तुम नहीं जानती ????'
संगीता अवाक् रह गई ।
उसने दोबारा पूछा....' क्या कह रहे हैं आप चाचा जी???'
चाचा जी ने कहा ....'हां !संगीता वह लड़का अजय ही है ।तुम्हारा कॉलेज का दोस्त ।'
'जब तुम्हारे बारे में उसे पता चला तब वह मेरे पास आया था और उसने तुम्हारे साथ शादी करने का प्रस्ताव रखा था ।
मैंने तुम्हारी मां को बताया तो वो कुछ सुनी ही नहीं ,वह बोली जैसा मुझे ठीक लगे मैं करूं ।इसीलिए अजय को मैंने घर भेजा था, कि तुम लोग आपस में बात कर सको।
तभी वहां अजय आ गया। अपने घुटनों पर आकर अजय ने अपना हाथ बढ़ा या और संगीता से बोला ....
'संगीता !क्या तुम अपनी जिंदगी को दोबारा एक मौका दोगी ????
"मुझसे शादी करोगी ???"
संगीता ने अजय का हाथ थामकर कहा....' हा! अजय मैं अपनी जिंदगी को दुबारा नई उड़ान दूंगी ।तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी एक नए सिरे से शुरू करूंगी। '

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