मुंबई के जाने-माने रिहायशी इलाके में ,20 मंजिला इमारत की 15वी मंजिल पर रहने वाली मनीषा अपने पति दिलीप, अपने दो प्यारे बच्चे और सास ससुर के साथ रहती थी।
आने वाला हर दिन उसे ऐसा लगता मानो उसके लिए बोझ हो। ऐसा नहीं था कि दिलीप उसे प्यार नहीं करता था, या सांस और ससुर उसके साथ दुर्व्यवहार करते थे। या पैसों की कोई कमी थी, लेकिन कहते हैं इंसान जब तक खुद की खुशी समझ नहीं पाता। बस उसके लिए वह खुशी एक मृगतृष्णा बन कर रह जाती है।
मनीषा के साथ भी कुछ ऐसा ही था। सब कुछ था उसके पास। लेकिन न जाने क्या था... जिसकी उसे तलाश थी?????
हर दूसरे दिन उसकी आंखों में आंसू होते। सारी रात जागकर न जाने क्या सोचा करती थी??? कई बार अपने दोस्तों से मिलती ,अपना दुख हल्का करती । लेकिन उसके परेशानी की वजह कोई जान ही नहीं पाया ।
उसकी खुशी कहां है ??आखिर वह क्या चाहती है ??उसे पता ही नहीं था।
समय यूं ही बीत रहा था। उसने अपनी जिंदगी को बेमानी मान ही लिया था। बस मन ही मन घुट- घुट कर जी रही थी ।
उसकी ही इमारत में एक नए पडोसी आ गए। उनका नाम था अंजली। उम्र करीब ३० के आसपास थी ।रहन-सहन बिंदास ।घर आने -जाने के लिए समय की कोई पाबंदी नहीं थी ।
मनीषा ,अंजलि को देखा करती थी ।मनीषा अंजली की जिंदगी को देखती तो उसे अपनी जिंदगी और भी ज्यादा बदतर लगने लगती।
धीरे धीरे दोनों की दोस्ती हो गई ।जहां अंजली उसे बेफिक्र होकर जीने की राह बताती ।घर के काम ,सास ससुर की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई , पति के साथ समय बिताना यह सब समय बर्बाद करना होता है, यह बात अंजली ने, मनीषा के दिलो-दिमाग पर डाल दी थी।
धीरे धीरे दोनों की दोस्ती हो गई ।जहां अंजली उसे बेफिक्र होकर जीने की राह बताती ।घर के काम ,सास ससुर की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई , पति के साथ समय बिताना यह सब समय बर्बाद करना होता है, यह बात अंजली ने, मनीषा के दिलो-दिमाग पर डाल दी थी।
अंजली अकेले ही रहती थी और उसके ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं थी। बिंदास रहती है। खुद का छोटा सा एक बिजनेस चलाती ।जब चाहे उठती है ,जब चाहे घर आती। जो चाहे कपड़े पहनती । जहां चाहे घूमती फिरती ।
अंजलि ने मनीषा के कानों में भी यह बात डालना शुरू कर दिया कि मनीषा का आखिर अस्तित्व क्या है?? मनीषा के जीवन का कोई उद्देश्य है भी या नहीं ???या वह अपना जीवन अपने परिवार के नाम बस यूं ही जाया कर देने वाली है???
कहते हैं कि जब कोई आप को एक ही चीज बार- बार बताता है , तो धीरे -धीरे हम उस उस बात पर यकीन करने लगते हैं। ऐसा ही हुआ।
मनीषा अब अंजली की तरह है खुद का जीवन जीना चाहती थी ।धीरे धीरे उसने घर के कामों के लिए जहां बाई लगा दी ।बच्चों को खुद पढ़ाने की बजाय ट्यूशन भेजने लगी ।खाना बनाने के लिए भी उसने एक रसोईया रख लिया ।
अपने पति से बस कह दिया कि अब वह जीना चाहती हैं खुलकर। उसे अपने अस्तित्व को ढूंढना है। उसके पति ने उसे समझाया कि एक व्यक्ति के लिए उसका परिवार और उनकी खुशी से बढ़कर और क्या होता है ???लेकिन उस पर तो अंजली की बातो का असर छाया हुआ था।
अंजली और मनीषा काफी सारा समय साथ ही बिताने लगी थी। मनीषा अंजली की लाइफ़स्टाइल से ऐसी सम्मोहित हो चुकी थी कि अब उसे बिल्कुल उसी की तरह जीना अच्छा लगने लगा था।
अंजलि के कहने पर मनीषा ने उसी के ऑफिस में काम करना शुरू कर दिया ।अब तो मानों जैसे वह सिर्फ घर सोने ही आया करती थी । सब ने मिलकर उसे बहुत समझाया कि अपने परिवार को छोड़कर उसे कोई खुशियां हासिल नहीं हो पाएंगी।
लेकिन वह नहीं मानी ।
धीरे-धीरे संबंधों में दरार आने लगी ।और वह दिन भी आ गया जब मनीषा को एक फैसला लेना पड़ा ।ऐसा फैसला जो उसके लिए बहुत मुश्किल नहीं था ,क्योंकि अब उसे अपना परिवार और अपनी बिंदास जिंदगी में से एक को चुनना था ।उसने अपना परिवार छोड़ दिया और यह कहते हुए घर से चली गई कि अब उसे अपनी एक पहचान बनानी है अपना अस्तित्व कायम करना है।
6 महीने बीत गए । दोनों उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह रहने लगी। जहा अंजली अपनी कंपनी के काम से अक्सर बाहर रहा करती थी। मनीषा ऑफिस का काम देखा करती।
शुरू में सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था ।आराम से उठना देर रात घरा आना ।सब कुछ ऐसे ही हो रहा था जैसे कि मनीषा चाहती थी। अंजलि के लिए शराब पीना, सिगरेट पीना, घूमना यह सब बहुत ही आम सी बात थी ।मनीषा को भी यह सारी आदतें लग चुकी थी।
एक दिन मनीषा को यह पता चला कि यह कंपनी अंजली की तो है ही नहीं बल्कि अंजली के किसी दोस्त कबीर की है और कबीर जल्द ही वह कंपनी बंद करने वाला है । सब कुछ बेच कर अंजलि और कबीर ऑस्ट्रेलिया चले जाने वाले हैं ।यह जानते ही, मनीषा के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अंजलि ने मनीषा के भोलेपन का फायदा भी खूब उठाया था। अंजली ने नशे कि हालत में मनीषा के कुछ आपत्तिजनक फोटो शूट करवाए थे ,जो कि उसमें इंटरनेट पर वायरल कर दिए थे। इस बात की खबर मनीषा को नहीं थी ।लेकिन जब उसे यह पता चला तब बहुत देर हो चुकी थी ।उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ?
उसे यह पता चल चुका था कि अंजली जो कंपनी चलाती है वह सिर्फ बाहरी दिखावा है असल में तो वहां कुछ गलत काम करती है जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने अपने पति को सारी बात बताने का तय किया और उस से मदद मांगी।
दिलीप ने एक मिनट भी नहीं लगाया और उसने जल्द ही पुलिस से इस बारे में बात की । मनीषा ने भी अंजलि के खिलाफ सारे सबूत इकट्ठे किए और पुलिस को दे दिए। पुलिस ने मनीषा के सारे वीडियो और सारे फोटो इंटरनेट से निकलवा दिए । अंजलि के खिलाफ सारे सबूत थे इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
मनीषा अपने किए हुए पर बहुत पछता रही थी। उसने दिलीप से माफी मांगी ।अपने घर परिवार के लोगों के सामने हाथ जोड़कर अपनी गलती मानी ।
दिलीप ने कहा तुम इस घर पर रहते हुए भी अपने सपने पूरे कर सकती हो। दिलीप ने मनीषा को समझाया कि एक व्यक्ति तभी खुश रहता है जब उसका परिवार उसके साथ हो ।जब वह अपने परिवार के चेहरे पर खुशी देखें तो उसे खुशी मिले ।
रहा सवाल तुम्हारे अस्तित्व का तो .....
तुम ही बताओ क्या तुम अपने परिवार को छोड़कर कुछ पा सकी ???
तुम पहले खुद अपने मन में झांक कर ,अपने आपसे पूछो आखिर अस्तित्व क्या है ??
तुम्हारा एक स्त्री होना ,तुम्हारा एक मां होना, क्या यह तुम्हारे अस्तित्व का हिस्सा नहीं है ????
हां! मैं मानता हूं कि घर की जिम्मेदारी के कारण तुम बाहर जाकर कुछ नहीं कर पा रही, लेकिन इससे तुम्हारे अस्तित्व में कोई कमी नहीं आती ।
यदि तुम यह बात समझ लो तो ,तुम्हें कभी भी किसी भी अंजली की मदद लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कोई भी इंसान अपने परिवार से दूर रहकर खुश नहीं रह सकता।
मनीष आप सब कुछ समझ गई थी आप वहां अपने परिवार के साथ बेहद खुश थी।

Agar Manisha ke pati aur parivar ne he usey samay de kar, ussey baatey kar ke yeh jaanne ki koshish ki hoti ki woh Kya chahati hai aur uski Khushi bhi ek priority banayi hoti jitni Baki sabhi sadasyo ki hai toh usey kabhi kisi Anjali ki jaroorat nahi padti.
ReplyDeleteHumey bachpan se yehi batakar bada Kiya jaata hai ki sabki Khushi main humari khushi hai par sab main hum khud bhi toh shamil hai :-) aur humari khushi bhi bahot jaroori hai yeh bhula diya jaata hai.
Kyun Manisha ke family members ne uska dukh notice nahi kiya, kyun nahi usey chance diya gaya kuch Karne ka, kyun Ghar ke kaamo main haath bataney ki kisi ne nahi sochi ki woh aapne liye waqt nikal sakey?
Agar aaisa hota toh shayad Manisha jaisa chahati thee waisa apna ek agal astitva bana sakti thee jisse usey aapne hone par behaad khushi mehesoos ho!
Thx dear for reading.
DeleteYes it's true.