हजारों लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सरला का स्वागत किया गया ।
सरला के स्वागत के लिए ,सभी लोग उसको सम्मान देते हुए खड़े हो गए।
सरला 58 वर्ष की महिला ,5 फुट 7 इंच का कद, बालों का जुड़ा बनाया हुआ ,कॉटन की साड़ी पहने हुए, चाल में आत्मा विश्वास ,चेहरे पर स्वाभिमान था, आंखों में विनम्रता के भाव थे ।
सरला के स्वागत के लिए ,सभी लोग उसको सम्मान देते हुए खड़े हो गए।
सरला 58 वर्ष की महिला ,5 फुट 7 इंच का कद, बालों का जुड़ा बनाया हुआ ,कॉटन की साड़ी पहने हुए, चाल में आत्मा विश्वास ,चेहरे पर स्वाभिमान था, आंखों में विनम्रता के भाव थे ।
हाथ जोड़े वह स्टेज पर आ रही थी ।
आज सरला को चिकित्सा जगत में बहुत बड़ा सम्मान दिया जा रहा था। पिछले 25 सालों से उनके निरंतर प्रयास की सराहना की जा रही थी।
सरला हाथ जोड़कर, सब से विनती करती हुई ,सबको धन्यवाद देती हुई और सब को बैठ जाने का इशारा करती हुई स्टेट तक पहुंच चुकी थी।
मंच पर मौजूद कादंबरी जी ने फूलों के गुलदस्ते से उनका स्वागत किया और उनकी सफलता के बारे में दो शब्द कहने का आग्रह किया।
सरला बड़ी विनम्रता से माइक को हाथ में लेकर बोली,
" आप सभी का धन्यवाद.... !!!आप सभी ने मुझे इस काबिल समझा और इतना बड़ा पुरस्कार दिया।इतना सम्मान दिया।आज मैं जहां भी हूं, जिस पद पर हूं, उसका सारा श्रेय सिर्फ मेरे एक कदम को जाता है, जो मैंने बरसों पहले लिया ।मैंने उस पिंजरे को तोड़कर बाहर निकलने की हिम्मत की थी और मैं उस में कामयाब रही।वरना आज सरला शर्मा नाम की किसी भी व्यक्ति का कोई भी वजूद नहीं होता ।"
बस इतना ही कह कर उन्होंने सबसे विदा ले ली ।
सरला अपने घर की तरफ जाने लगी ,लेकिन कार में बैठे- बैठे वह अपने अतीत में खो गई ।बात करीब 30 साल पुरानी है।
सरला अपने घर की तरफ जाने लगी ,लेकिन कार में बैठे- बैठे वह अपने अतीत में खो गई ।बात करीब 30 साल पुरानी है।
जब सरला अपने योंवन की दहलीज पर खड़ी थी। बड़ी खुश थी सरला ,क्योंकि उसका विवाह सुप्रसिद्ध डाक्टर दीपक शर्मा के साथ तय हो चुका था ।
डॉक्टर दीपक शर्मा को किसी भी परिचय की आवश्यकता नहीं थी। दीपक शर्मा के कई अस्पताल थे।
दूर-दूर से लोग उनके पास इलाज कराने आते थे ।सरला बहुत से सपने संजोकर ससुराल आ गई थी।
दूर-दूर से लोग उनके पास इलाज कराने आते थे ।सरला बहुत से सपने संजोकर ससुराल आ गई थी।
उसे पूरा विश्वास था कि उसने जो डॉक्टर की डिग्री हासिल की है, अब उसे वह लोगों की सेवा में प्रयोग कर सकेगी ।
जिस तरह से छोटा बच्चा गुब्बारे से खेलता है और अचानक गुब्बारा फूट जाता है ।उसी तरह सरला का सपना एक रात में ही टूट गया ।जब शादी की रात ही दीपक शराब के नशे में चूर होकर देर-रात घर आया था।
सरला का सिर्फ कारण पूछना और दीपक का उसे बेरहमी से मारना ,मानो जैसे उस दिन सरला का केवल शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा भी लहूलुहान हो गई थी।
सरला का सिर्फ कारण पूछना और दीपक का उसे बेरहमी से मारना ,मानो जैसे उस दिन सरला का केवल शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा भी लहूलुहान हो गई थी।
दिल के कोने में फिर भी उसे आशा थी कि उसके अच्छे व्यवहार से सब कुछ ठीक हो जाएगा। दिन बीतते गए दीपक और उसकी मां के अत्याचारों में बढ़ोतरी होती गई।
सरला के खाने- पीने, उठने -बैठने , पहनने- ओढ़ने यहां तक की किसी से बात करने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी।
सरला के खाने- पीने, उठने -बैठने , पहनने- ओढ़ने यहां तक की किसी से बात करने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी।
सरला को केवल तभी बाहर ले जाया जाता, जब समाज में पत्नी को लाना जरूरी हो जाता या फिर बड़ी- बड़ी मीटिंग जहां डॉक्टर की पत्नियां साथ आया करती थी ।मात्र नुमाइश के लिए सरला को ले जाया जाता था। सरला इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि आखिर उसमें ऐसी क्या कमी थी कि उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा था ।
कुछ दिनों में सरला को यह बात समझ में आ गई उसके पति जो बाहर बड़ी -बड़ी बातें करते हैं ,महिलाओं को सम्मान देने की बातें करते हैं, समाज में बदलाव लाने की बातें करते हैं ,उन्हें खुद पर ऐसा गुरूर है कि वह अपने से आगे किसी को भी सम्मान नहीं दे सकते। उसे पता चल चुका था कि उसके पति अहंकारी ,घमंडी और पुराने ख्यालात के हैं।
सरला घर के काम करने और कभी कभार पति को खुश करने का सामान रह गई थी ।शादी के 2 साल हो चुके थे। अपने मां- पिता को उसने ससुराल में होने वाले दुर्व्यवहार की पूरी जानकारी तो नहीं दी लेकिन थोड़ा- बहुत बता चुकी थी ।
उसके पिता ने उसे कहा "कि तुम शादी तोड़ दो। मैं नहीं चाहता कि तुम इस रिश्ते में घुट घुट कर जीती रहो।"
उसके पिता ने उसे कहा "कि तुम शादी तोड़ दो। मैं नहीं चाहता कि तुम इस रिश्ते में घुट घुट कर जीती रहो।"
लेकिन सरला चाहती थी कि वह अपने वैवाहिक जीवन को संभाल ले ।
लेकिन ऐसा ना हो सका। इस बीच सरला ने एक खूबसूरत सी प्यारी सी बेटी को जन्म दिया ... 'कस्तूरी'
लेकिन ऐसा ना हो सका। इस बीच सरला ने एक खूबसूरत सी प्यारी सी बेटी को जन्म दिया ... 'कस्तूरी'
' कस्तूरी' के आते ही वह फिर से मुस्कुराने लगी । उसने मान लिया कि उसकी डॉक्टर की डिग्री सिर्फ तिजोरी में रखने लायक रह गई है। अब अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाने से भी वह डरने लगी थी। कस्तूरी 1 साल की हो गई ।
लेकिन फिर भी ना तो सरला की सास में और ना ही दीपक में रत्ती भर का बदलाव आया ।
लेकिन फिर भी ना तो सरला की सास में और ना ही दीपक में रत्ती भर का बदलाव आया ।
उस पर होने वाले अत्याचार बढ़ने लगे थे। किचन के सामान में ताले लगा दिए जाते थे ।कहीं भी वह फोन नहीं कर सकती थी। चुपके- चुपके फिर उसने पड़ोस में रहने वाले लोगों से आंखों ही आंखों में अपने दर्द का इजहार किया।
पड़ोस में रहने वाली रत्ना आंटी ने उसके दर्द को समझा ।कभी भूख लगती तो वह चुपके से रत्ना आंटी से दाल चावल मांग लेती और बर्तन मांजने की जगह पर ही खा लेती।
सांस जब सो जाती तब वह रत्नाआंटी से बेटी के लिए दूध मांग लाती ।
पड़ोस में रहने वाली रत्ना आंटी ने उसके दर्द को समझा ।कभी भूख लगती तो वह चुपके से रत्ना आंटी से दाल चावल मांग लेती और बर्तन मांजने की जगह पर ही खा लेती।
सांस जब सो जाती तब वह रत्नाआंटी से बेटी के लिए दूध मांग लाती ।
उसके लिए यह जिंदगी बद से बदतर होती जा रही थी। उसके पति का यह स्वभाव, यह बर्ताव सिर्फ इसलिए था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी पत्नी का नाम चिकित्सा जगत में उससे भी ऊपर आ जाए।
सरला ने एक दिन अपने पिता से बात की ।2 मिनट में ही उसके पिता ने उसकी पीड़ा को समझ लिया और उसे आश्वासन दिया कि अब वह उसे उस नर्क में नहीं रहने देंगे ।
राखी का त्यौहार पास आ रहा था ,सरला के पिता सरला के ससुराल आए उसे राखी के लिए ले जाने के बहाने सरला को अपने साथ ले गए।
राखी का त्यौहार पास आ रहा था ,सरला के पिता सरला के ससुराल आए उसे राखी के लिए ले जाने के बहाने सरला को अपने साथ ले गए।
उस दिन सरला कार में बैठी और पीछे मुड़कर नहीं देखा ।
वो खुश थी कि आज वह पिंजरा छोड़ कर उड़ने के लिए तैयार है।
वो खुश थी कि आज वह पिंजरा छोड़ कर उड़ने के लिए तैयार है।
बस उसकी आंखों में ढेर सारा धन्यवाद रत्ना आंटी के लिए था ।
अपने पिता के घर आते ही उसने अपनी बेटी और अपने उज्जवल भविष्य के लिए हिम्मत बांध ली और दोबारा उसने अस्पताल में काम करना शुरू कर दिया।
जहां कस्तूरी अपनी मां की तरह स्वाभिमान से जीना सीख चुकी थी। वहीं सरला का नाम हर अखबारों में आने लगा था ।
दूसरी तरफ कर्म का पहिया घूमते हुए दीपक शर्मा के की चौखट पर जा पहुंचा था।
उसके बुरे कर्मों का घड़ा भर चुका था और अब उसका पतन शुरू हो गया था ।अब जहां एक -एक करके उसके अस्पताल बंद होने लगे, वहीं उसके अपनी पत्नी के साथ किए जाने वाले अत्याचारों की हवा भी सब जगह फैल चुकी थी ।
अब ना तो समाज में उसकी कोई इज्जत रह गई, नाही उससे इलाज कराने वाले मरीज ।
उसके बुरे कर्मों का घड़ा भर चुका था और अब उसका पतन शुरू हो गया था ।अब जहां एक -एक करके उसके अस्पताल बंद होने लगे, वहीं उसके अपनी पत्नी के साथ किए जाने वाले अत्याचारों की हवा भी सब जगह फैल चुकी थी ।
अब ना तो समाज में उसकी कोई इज्जत रह गई, नाही उससे इलाज कराने वाले मरीज ।
दीपक का घमंड जो सर चढ़कर बोल रहा था चूर- चूर हो गया था ।
उसका बगला बिक चुका था। अब एक छोटे से घर में रहने लगा था ।अस्पतालों में मरीजों का इलाज भी ठीक से ना करने की वजह से उस पर मुकदमे चलने लगे थे।
उसका बगला बिक चुका था। अब एक छोटे से घर में रहने लगा था ।अस्पतालों में मरीजों का इलाज भी ठीक से ना करने की वजह से उस पर मुकदमे चलने लगे थे।
उसकी मां को भी इस बात का ऐसा सदमा लगा कि वह मौत के मुंह में समा गई ।
रह गया अकेला दीपक और उसका गुरुर।
जिसका कोई वजूद नहीं था जो केवल अपनी पत्नी को इस वजह से सम्मान ना दे पाया कि कहीं उसका समाज में नाम कम न हो जाए ।
आज उसका कोई नहीं था। ना कोई अस्तित्व रह गया था।
बल्कि उसके नाम से लोगों में नफरत ही आने लगी थी। और वह न जाने कहां गुमनामी के अंधेरों में खो गया था।
दूसरी ओर सरला एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थी और उसकी बेटी कस्तूरी उसका गौरव बन चुकी थी ।
हर कोई सरला के सानिध्य में रहने की बात सोचता रहता था ।हर एक नया डॉक्टर उसके साथ काम करने के लिए आतुर होता था ।
सरला का वह एक फैसला आज उसके लिए अमृत तुल्य बन गया था ।उसका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका था ।उसने हजारों लोगों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता बना दिया था ।उसने लोगों को बताया हिम्मत एक ऐसी चीज है, एक ऐसा हथियार है, जिससे ना केवल आप अपना बल्कि दूसरों का भी जीवन बदल सकते हैं ।
उस पिंजरे से बाहर निकल कर सरला ने साबित कर दिया कि दर्द सहने वाला उतना ही दोषी है जितना दर्द देने वाला ।
इसलिए हिम्मत करें और मुश्किलों का सामना करें क्योंकि हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती।
आज उसका कोई नहीं था। ना कोई अस्तित्व रह गया था।
बल्कि उसके नाम से लोगों में नफरत ही आने लगी थी। और वह न जाने कहां गुमनामी के अंधेरों में खो गया था।
दूसरी ओर सरला एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थी और उसकी बेटी कस्तूरी उसका गौरव बन चुकी थी ।
हर कोई सरला के सानिध्य में रहने की बात सोचता रहता था ।हर एक नया डॉक्टर उसके साथ काम करने के लिए आतुर होता था ।
सरला का वह एक फैसला आज उसके लिए अमृत तुल्य बन गया था ।उसका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका था ।उसने हजारों लोगों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता बना दिया था ।उसने लोगों को बताया हिम्मत एक ऐसी चीज है, एक ऐसा हथियार है, जिससे ना केवल आप अपना बल्कि दूसरों का भी जीवन बदल सकते हैं ।
उस पिंजरे से बाहर निकल कर सरला ने साबित कर दिया कि दर्द सहने वाला उतना ही दोषी है जितना दर्द देने वाला ।
इसलिए हिम्मत करें और मुश्किलों का सामना करें क्योंकि हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती।

👌👌👍👍
ReplyDeleteआपका बहुत बहुत धन्यवाद।
ReplyDelete👏👏👏👍
ReplyDeleteThanks so much.
DeleteNice and well written
ReplyDeleteSuperb
ReplyDeleteThx dear 😘
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