Skip to main content

बनोगी मेरी जीवनसंगिनी??????

बारिश की बूंदों को अपने हाथों में लेकर प्रियंका ने मयंक के चेहरे पर फेंका ।मयंक मुस्काया और बोला .....'अच्छा जी यह बात है'

 तभी उनका बेटा रोहित आ गया। प्रियंका ने अब रोहित को भिगो दिया। सभी बारिश का मजा लेने लगे ।तभी फोन की घंटी बजी और मयंक बालकनी से कमरे में गया। फोन ऑफिस के किसी स्टाफ का आया था ।

मयंक ,प्रियंका और उनका ५ साल का बेटा भोपाल में बहुत ही खुशी का जीवन बिता रहे थे ।

मयंक भावुक, गंभीर और समझदार था। वही प्रियंका बहुत चंचल, बहुत बातें करने वाली ,लेकिन सुलझी हुई लड़की थी ।

मयंक ने प्रियंका को आवाज देते हुए कहा ....प्रियंका, मुझे 2 दिनों के लिए मुंबई जाना होगा ।

मत जाओ ना' प्रियंका ने उदास होकर कहा।

 जाना पड़ेगा, क्या करें? काम है।

 जल्दी आ जाऊंगा। मयंक ने प्रियंका को गले लगाते हुए कहा ।

मयंक सुबह जल्दी ही चला गया ।

रोहित को स्कूल भेजकर प्रियंका घर पर अकेली बैठी थी बोर हो रही थी ।इसलिए उसने अपनी पुरानी सहेली रत्ना को फोन किया।

  फोन की घंटी बज रही थी सामने से आवाज आई' हेलो'...

प्रियंका बोली कैसी हो रत्ना??? मैं प्रियंका बोल रही हूं ।

रत्ना की आवाज में जोश आ गया ।वह चौकते हुए बोली ....'अरे !!!!!!प्रियंका, तुम इतने सालों के बाद ।कैसी हो ?

प्रियंका ने जवाब देते हुए कहा 'मैं तो एकदम अच्छी हूं'। 'मयंक टूर पर गए हैं ,और मैं बहुत बोर हो रही थी ,इसलिए सोचा तुझे फोन कर लूं ।

दोनों की बहुत सारी बातें हुई ।करीब आधा घंटा हो गया ।रत्ना प्रियंका से  पूछा..

..' प्रियंका तुम क्या अपनी शादी से सचमुच खुश हो???

 क्या तुम पवन को भूल गई???

 प्रियंका ने बिना कोई जवाब दिए फोन काट दिया और दौड़कर बालकनी में आ गई और अपने अतीत में खो गई ।

कॉलेज के दिन थे ।प्रियंका और पवन जैसे एक दूसरे के बिना कभी रह नहीं पाएंगे ।कॉलेज के दोस्त बस उनकी शादी का इंतजार कर रहे थे।

 दोनों को एक दूसरे पर इतना विश्वास था कि घरवालों के इंकार कि उन्हें कोई चिंता भी नहीं थी ।

प्रियंका ने कई बार शादी की बात की लेकिन पवन ने पक्की नौकरी करने पर शादी करने का वादा किया।

 प्रियंका के मां बाप ने प्रियंका के लिए लडका ढूंढना शुरू कर दिया था ।
प्रियंका के बार बार मजबूर करने पर पवन ने प्रियंका के साथ मंदिर में शादी करने के लिए हां कह दी।

 इधर प्रियंका को देखने के लिए लड़के वाले आ गए। सब कुछ अच्छा था। इसलिए बड़ों ने बातें पक्की कर दी ।

लेकिन प्रियंका ने लड़के से अकेले में बात की और उसे पवन के बारे में सारी बातें बता दी।

 अगले दिन प्रियंका और पवन मंदिर में शादी करने वाले थे ।प्रियंका मंदिर पहुंच गई, उसकी नई- नई उमंगे हिलोरे मार रहे थी।

 कुछ देर इंतजार किया और फिर पवन को फोन लगाया पवन ने फोन नहीं उठाया ।

उसकी धड़कन बढ़ने लगी एक एक मिनट प्रियंका के लिए भारी हो रहा था।

 अब करीब 2 से 3 घंटे बीत चुके, लेकिन पवन नहीं आया ।प्रियंका अपना सा चेहरा लेकर घर पहुंच गई।

 उसे पवन पर गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ नहीं कर पाई।

 घर पहुंचते ही उसने देखा जो लड़का उसे देखने आया था वह घर पर था। प्रियंका ने आश्चर्य से पूछा तुम मेरे घर पर?????

 वह बोला हां मैं जानता हूं कल आपने मेरा रिश्ता ठुकरा दिया था। लेकिन आपने जिस पवन के लिए मुझे ठुकराया था मैं उसे अच्छी तरह से जानता हूं ,लेकिन मुझे आपके विश्वास पर विश्वास था इसलिए कल मैंने पवन की हकीकत के बारे में आपको नहीं बताया‌।

लेकिन आज सुबह जब मैंने पवन को बस अड्डे पर कोलकाता की बस पर चढ़ते हुए देखा तब मैं सब कुछ समझ गया था।

 प्रियंका यदि आज आप अपना अतीत भूल कर मेरे साथ अपना जीवन अपने पूरे मन से बिता सके ,तो मैं आपका जीवनसाथी जरूर बनना चाहूंगा।

 प्रियंका के पास कोई शब्द नहीं था। प्रियंका तो शायद उस लड़के का नाम भी नहीं जानती थी ।प्रियंका ने आंखों के आंसू को पूछते हुए पूछा ...."क्या मैं आपका नाम जान सकती हूं?"

 उसने कहा........  मयंक


Comments

Popular posts from this blog

अब नहीं होंगे गर्मी की छुट्टियों में बच्चे बोर

 गर्मी की छुट्टियों का इंतजार बच्चों को बेसब्री से होता है ।पूरे साल में यही वे दिन होते हैं जब वे बिना किसी टाइम टेबल के समय बिताते हैं । लेकिन गर्मी की छुट्टियां आते ही ,बच्चों के मम्मी और पापा परेशान से हो जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी यही परेशानी होती है ,कि  बच्चों को पूरा दिन कैसे व्यस्त रखा जाए??? क्योंकि  बच्चे ज्यादातर समय अपना इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे कि मोबाइल ,लैपटॉप ,टीवी आदि में दे देते हैं । तो चलिए आप सभी के लिए मैं कुछ सुझाव लाई हूं ,आशा करती हूं कि यह सुझाव आपके बच्चों के जरूर काम आएगा। गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को किसी  टाइम टेबल  के तहत ना बांधे । गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए  आपका साथ  सबसे ज्यादा जरूरी होता है। बच्चों को प्रकृति से मिलाएं आपके आसपास यदि कोई  नर्सरी  है तो आप बच्चों को वहां ले जा सकते हैं ।जहां वे नए -नए पौधों के बारे में, इनडोर -आउटडोर प्लांट्स के बारे में जानकारी पा सकते हैं ।उनके मनपसंद  पौधों को घर लेकर आए और उसमें पानी डालने की जिम्मेदारी बच्चे क...

रात के खाने में क्या बनाऊं???? एक राष्ट्रीय समस्या

रात के खाने में क्या बनाया जाए??? इसे  एक राष्ट्रीय समस्या घोषित कर देना चाहिए।  हर एक घर में शाम होते ही मम्मी की आवाज शुरू हो जाती है, आज खाने में क्या बनाऊं ??? फोन करके पति को पूछा जाता है ..आज खाने में क्या खाओगे???  यह बात और है कि पत्नी बनाती वही है ,जो वह चाहती है ।लेकिन पूछना मानो उसका नियमित कर्म हो   ।वह सिर्फ यह सुनना चाहती है कि...कोई यह कह दे कि खिचड़ी बना लो । लेकिन मजाल है जो घर का कोई भी  सदस्य  यह कह दे कि..आज खिचड़ी बना लो।  बच्चों से पूछा जाए तो बच्चे कहते...' मम्मी कुछ  अच्छा बनाना आज'   बहुत दिन हो गए ...बस कुछ अच्छा बना लो मम्मी आज । पतिदेव को पूछो तो  पतिदेव कहते हैं ...' जो बनाना हो बना लो.... सब चलेगा '(क्योंकि जनाब, पतिदेव पत्नी की आदत से अब पूरी तरह से वाकिफ हो चुके हैं)  इस बात से पत्नी कभी संतुष्ट नहीं होती, दोबारा पूछती है । कुछ भी का क्या मतलब होता है??? कुछ तो बताओ  । रोज  यही पूछना पड़ता है। मैं भी परेशान ह...

डिब्बे की अदला बदली से खुल गई पोल

ममता की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे । वह खुद को अपने ससुराल के रंग में रंगने की कोशिश कर रही थी ।इत्तेफाक से उसकी ननद का नाम भी ममता ही था ।हालांकि ममता दीदी उससे बड़ी थी और उनकी शादी हो चुकी थी। वह अपने ससुराल में बेहद खुश थी।  सावन का महीना शुरू होने ही वाला था।  ममता का यह पहला त्यौहार था इसलिए सांस ने सोचा क्यों ना बहू को साड़ी दे दी जाए।  सास और बहू दोनों ही साड़ी की दुकान पर पहुंच गई। सास ने बहू से कहा  ...'बहु तुम अपने लिए साड़ी पसंद कर लो, लेकिन ध्यान रखना ज्यादा महंगी मत लेना अभी शादी पर बहुत खर्चा हुआ है।'मैं तुम्हारी ममता दीदी के लिए भी एक सस्ती सी साड़ी देख लेती हूं तब तक।' बहू को लगा कि  सास सही कह रही है।उसने ₹१७00 की साड़ी पसंद कर ली ।तब तक सास ने भी ममता दीदी के लिए साड़ी पसंद कर ली और तुरंत ही दुकानदार को दोनों साड़ियों को डिब्बों में पैक करवाने के लिए भी कह दिया।सास ने तुरंत बिल भर दिया ।जिस पर ममता का कोई ध्यान नहीं था।  दोनों खुशी-खुशी घर लौट आए ।  बहु के हाथ से सासुमा ने  साड़ी का ए...