यह लेख हो सकता है कि किसी को पसंद ना भी आए लेकिन फिर भी यह मेरे दिल की बात है जो मैं लिखना जरूर चाहूंगी मुझे एक माध्यम मिला है जिसके जरिए में अपने विचारों को प्रस्तुत करना जरूर चाहूंगी.
जब भी लड़का और लड़की के बारे में बात होती है ,उन में किए जाने वाले अंतर की बात होती है ,तो सबसे पहले मुझे यही शिकायत है .....
क्यों हमेशा लड़की को ही अपने हक के लिए लड़ना पड़े ?
क्यों लड़की इस कशमकश में में उलझी रहे की उसका अपना घर कौन सा है...? उसका मायका या उसका ससुराल??????
लड़की के मां बाप को ही हमेशा क्यों झुकना पड़े?
क्यों लड़की को अपने मायके जाने के लिए अपने पति की परमिशन लेनी पड़े?
क्यों लड़की के मां-बाप अपनी बेटी को देखने तक के लिए तरस जाए ?
क्यों लड़की के पहनावे पर लड़का प्रश्नचिन्ह उठाएं????
आखिर क्यों ????
थोड़ा इसमें बदलाव लाना बहुत जरूरी है.
संस्कार सिर्फ लड़कियों को ही नहीं लड़कों को भी देना चाहिए .
पति का कोई हक नहीं बनता है अपने जीवन साथी, अपनी पत्नी को यह कहने का की तुम्हें कोई संस्कार नहीं दिए गए .
लड़के को कोई हक नहीं बनता यह कहना था कि तुम इस समय मायके नहीं जा सकती.
लड़के को कोई हक नहीं है अपनी पत्नी के कमाए हुए पैसों का हिसाब लेने का.
लड़के को कोई हक नहीं बनता कि वह अपनी पत्नी से यह कहे कि तुम्हारे रिश्तेदार तुमसे नहीं मिल नह
सकते.
लड़के का कोई हक नहीं बनता कि अपनी पत्नी के मां-बाप को बेइज्जत करें उनका तिरस्कार करें .
लड़के को कोई हक नहीं बनता लड़की से यह कहने का कि तुम्हें कुछ नहीं आता .
लड़के को कोई हक नहीं बनता अपनी पत्नी के साथ बदसलूकी करने का.
पति को इस बात का तो बिल्कुल भी लाइसेंस नहीं मिल जाता कि वह अपनी धर्मपत्नी अपनी जीवनसंगिनी को यह कहे कि निकल जाओ मेरे घर से.
और वह भी उस लड़की को जिस लड़की ने उस मकान को घर बनाया.
यदि बदलाव की बात है ,यदि समान अधिकार की बात है ,
तो फिर यह लड़कों पर भी लागू होना चाहिए .
फिर तो लड़की को पूरा हक है अपने पति को यह कहने का कि...
तुम्हें संस्कार नहीं दिए गए कि जो तुम मुझे गालियां देते हो या तो मुझ पर हाथ उठा लेते हो .
लड़की को पूरा हक है अपने सास ससुर के साथ दुर्व्यवहार करने का यदि उसका पति उसके मां-बाप के साथ दुर्व्यवहार कर सकता है तो .
लड़की को पूरा हक है घर के काम ना करने का क्योंकि वह अपने पति की तरह बाहर जाकर पैसे कमा सकती है .
लड़की को पूरा हक है अपने पति से यह कहना कि वह अपने पति के किसी भी रिश्तेदार को अपने घर में नहीं आने देगी क्योंकि जब उसका पति नहीं चाहता कि उसकी पत्नी के मां -बाप, रिश्तेदार उसके घर आए.
लड़की को भी लड़के की तरह पूरा अधिकार मिलना चाहिए कि वह अपने पति के पहनावे ,रहन-सहन, आदतों पर उसे सुना सके ,उसे ताना दे सके.
पूरा का पूरा खेल उल्टा हो जाए तो क्या होगा ??? बहुत बड़ा प्रश्न है....
ऐसा हुआ तो लड़के और लड़के वालों के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी.
मुझे लगता है कि लड़के और लड़की की बराबरी के इस अभियान में में थोड़ा बदलाव जरूरी है.
लड़की को नहीं लड़के को बदलने की जरूरत है.
लड़कों के मां बाप को बदलने की जरूरत है .
अपनी पुरानी सोच, पुराने घटिया दकियानूसी विचारों को बदलने की जरूरत है.
ज्ञान चाहे कितना भी ज्यादा क्यों ना हो लेकिन आपके संस्कार ,आपके विचार ,आपकी सोच सबसे ज्यादा मायने रखती हैं.
इसलिए लड़कों को भी दूसरों की इज्जत करना सिखाए खासकर उसकी पत्नी की.
jamana badalne laga hai.
ReplyDeleteaaj ki generation practical ho gayi hai. aaj ke ladke log apni wife k her kaam me haath batane lag gaye hai. chahe wo kaam ghar ki saaf safi ka ho ya khana banane ka yaha tak ki bachcho k diapers badalne tak ka kaam karne lage hai. vaise abhi bhi kuchh log apvaad roop hai. jo vahi puraani parmpara ko chipke baithe hai . jo ladkiyo ko heen samajhate hai.
Sahi baat hai.
Deletenice sketch
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