आज मेरा एक भ्रम टूट गया ।
मुझे यह भ्रम था ,कि जो मेरे दोस्त है, जो मेरे अपने हैं, जिन्हें मैं अपने दिल के करीब मानती हूं, उनसे मैं जब भी चाहूं वह कह सकती हूं ,और वह हमेशा मुझे समझेंगे।
लेकिन आज वह झूठ साबित हो गया और शीशे की तरह टूट गया ।
कहते हैं ना कि अपनी जिंदगी में दूसरों से अपेक्षाएं जितनी कम हो ..उतना ही आपका जीवन सुखद होता है।
मुझे ऐसा लगता था कि अपनों से अपेक्षाएं रखने में कोई बुराई नहीं, लेकिन यह भ्रम टूट गया और अच्छा हुआ समय रहते मुझे पता चल गया कि मैं गलत थी और लोग सही ।
कोशिश करूंगी खुद को बदलने की। कोशिश करूंगी दोबारा वह भ्रम मुझे ना हो ।कोशिश करूंगी कि किसी से ना मैं कोई वादा करूं और ना किसी से कोई अपेक्षा रखू।
ममता की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे । वह खुद को अपने ससुराल के रंग में रंगने की कोशिश कर रही थी ।इत्तेफाक से उसकी ननद का नाम भी ममता ही था ।हालांकि ममता दीदी उससे बड़ी थी और उनकी शादी हो चुकी थी। वह अपने ससुराल में बेहद खुश थी। सावन का महीना शुरू होने ही वाला था। ममता का यह पहला त्यौहार था इसलिए सांस ने सोचा क्यों ना बहू को साड़ी दे दी जाए। सास और बहू दोनों ही साड़ी की दुकान पर पहुंच गई। सास ने बहू से कहा ...'बहु तुम अपने लिए साड़ी पसंद कर लो, लेकिन ध्यान रखना ज्यादा महंगी मत लेना अभी शादी पर बहुत खर्चा हुआ है।'मैं तुम्हारी ममता दीदी के लिए भी एक सस्ती सी साड़ी देख लेती हूं तब तक।' बहू को लगा कि सास सही कह रही है।उसने ₹१७00 की साड़ी पसंद कर ली ।तब तक सास ने भी ममता दीदी के लिए साड़ी पसंद कर ली और तुरंत ही दुकानदार को दोनों साड़ियों को डिब्बों में पैक करवाने के लिए भी कह दिया।सास ने तुरंत बिल भर दिया ।जिस पर ममता का कोई ध्यान नहीं था। दोनों खुशी-खुशी घर लौट आए । बहु के हाथ से सासुमा ने साड़ी का ए...
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