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पिता का प्यार

मां की ममता, मां का आंचल, मां का बलिदान, मेरी प्यारी मां ....ऐसे शीर्षक आपने अक्सर पड़े होंगे.
मां के ऊपर बहुत सारी कविताएं और बहुत सारे लेख पढ़े होंगे .
क्यों ना हो मां होती ही ऐसी है .एक कवि या लेखक जब उनके बारे में लिखना शुरू करता है तो लेखनी रूकती नहीं और कागज खत्म हो जाते हैं.
मुझे ऐसा लगता है कि बच्चों को एक अच्छा जीवन, एक अच्छा भविष्य देने के लिए एक मां अपना सब कुछ बच्चों के लिए निछावर कर देती है .
लेकिन एक पिता मौन रहकर दिन -रात अपने बच्चों के सुंदर भविष्य के लिए तत्पर रहता है .
हालांकि उनका संवाद अपने बच्चों के साथ हो सकता है थोड़ा कम हो।
अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उन्हें शब्द ना मिलते हैं ।हो सकता है वह कभी यह  जताना नहीं चाहते ,कि उन्होंने सारा जीवन अपने बच्चों खासकर अपनी बेटियों के जीवन के लिए समर्पित किया ।
जब हम बीमार होते हैं, तो मां जरूर हमारे सिरहाने होती है ,लेकिन पिता का मन बहुत बेचैन हो जाता है।
जब हमारी परीक्षाएं होती हैं तो मां हमें  टोका करती है, लेकिन पिता  हमारे अच्छे से अच्छे कॉलेज में ऐडमिशन हो जाने के लिए पैसों की व्यवस्था करते हैं।
शादी में विदाई के समय मां फूट-फूट कर रोती है। लेकिन पिता अपनी नम आंखों से बेटी को विदा करते समय यही सोचते हैं बस मेरी बेटी हमेशा खुश रहे।
यही सोचते हैं भविष्य में कभी उसे कोई दुख ना हो।
शादी के बाद हम बेटियां अक्सर अपने माता-पिता से अपने ससुराल में होने वाली छोटी मोटी परेशानियां बांटते हैं।
कभी मां कहती हैं कोई बात नहीं ...सब ठीक हो जाएगा । तब पिता दूर बैठे यह सुनते हैं तो उनका मन टूटने लगता है ।
बहुत कुछ करना चाहते हैं वह अपनी बेटी के लिए। लेकिन कभी -कभी असहाय हो जाते हैं.
तब उनके मन की पीड़ा को कोई भी व्यक्ति समझ नहीं सकता ।
मां तो रो लेती है ,लेकिन पिता अपने आंसू तक नहीं दिखाता।
अपने पिता के कम बोलने को कभी यह न समझना उनका आपके प्रति प्रेम कम है।
बल्कि यह समझना कि वह अपनी जिंदगी का हर एक पल यही सोचते हैं की उनकी बच्ची ठीक रहें ,सुरक्षित रहें ,खुश रहे हैं ।
कभी ऐसे कटु वचन ना बोलना कि जिस दिल में उन्होंने आपको हमेशा बसाया है, वह टूट जाए।
कभी अपने मुंह से कभी ऐसे अपमानजनक शब्द ना कहना जिसे सुनकर उनकी आंखें नम हो जाए ।
कोशिश करना कि भले वो कुछ बोले या ना बोले उनका सम्मान करना। उनके दिल की भावनाओं को पढ़ने की कोशिश करना।
क्योंकि एक बेटी अपने पिता का गौरव होती है।  पिता सबके सामने अपनी बेटी का नाम गर्व से लेता है तो उसका सीना चौड़ा हो जाता है।

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