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अपना टाइम आयेगा


हम जब 10 th क्लास में होते हैं तो मम्मी -पापा कहते हैं बस 10th  क्लास में अच्छे नंबर लेकर आ जा फिर बस आगे सब सही है .
दसवीं होते ही वह बात भूल जाते हैं. फिर आती है 12वीं .
फिर से वही टाइप शुरू हो जाती है ...12वीं में जी जान से मेहनत कर ले ,अच्छा कॉलेज मिल जाए... फिर टेंशन नहीं है.
उसके बाद ग्रेजुएशन उसके बाद फिर से एक नया रिकॉर्ड ...अच्छी नौकरी मिल जाए ना तो फिर लाइफ सेट .
चलिए नौकरी भी मिल गई .
फिर मम्मी पापा को छोड़ो रिश्तेदार भी आपके पीछे पड़ जाते हैं और लाइफ में सेटल होना है या नहीं ???शादी कब कर रहे हो ??
फिर शादी, बच्चे ,शॉपिंग ,बिजली का बिल ,फोन का बिल , कभी ग्रॉसरी तो कभी सब्जियां, कभी स्कूल की फीस तो कभी दूसरों की शादियां और न जाने क्या-क्या...

मुझे लगता है यह नॉनस्टॉप टेप है और यदि हम यह सोच कर बैठे रहे कि ...अपना टाइम आयेगा तो हम अपनी लाइफ कभी नहीं जी पाएंगे.
क्योंकि टाइम आता नहीं टाइम निकालना पड़ता है.. टाइम को खुद लाना पड़ता है..
जिंदगी चलती ही जाती है. हमें लेकिन थोड़ा सा वक्त चुरा कर जिंदगी को जी लेना चाहिए....

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