बचपन में बहुत कॉमिक्स पढ़ी थी. लेकिन सबसे फेवरेट हुआ करती थी ..."चाचा चौधरी".
छोटे से कद वाले, पगड़ी पहनने वाले, सफेद मूंछ रखने वाले ..
चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी ज्यादा तेज चलता है ..
और उनके साथ उनका साबु .
बड़ा लंबा -चौड़ा ,ताकतवर .
सचमुच 5 मिनट में पूरी की पूरी कॉमिक्स खत्म हो जाती और जी भरता ही नहीं था .
एक के बाद एक पढ़ते ही रहते थे . दोस्तों से उधार लेकर भी आते थे . मोटू पतलू, चंपक, चंदा मामा .....इतनी सारी कहानियों की किताबें होती थी....
आज भी जब कभी चाचा चौधरी की किताब दिखाई देती है तो मैं जरूर खरीद कर पढ़ती हूं ।
आप ही मुझे बताइएगा आपकी फेवरेट कॉमिक्स कौन सी है????
ममता की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे । वह खुद को अपने ससुराल के रंग में रंगने की कोशिश कर रही थी ।इत्तेफाक से उसकी ननद का नाम भी ममता ही था ।हालांकि ममता दीदी उससे बड़ी थी और उनकी शादी हो चुकी थी। वह अपने ससुराल में बेहद खुश थी। सावन का महीना शुरू होने ही वाला था। ममता का यह पहला त्यौहार था इसलिए सांस ने सोचा क्यों ना बहू को साड़ी दे दी जाए। सास और बहू दोनों ही साड़ी की दुकान पर पहुंच गई। सास ने बहू से कहा ...'बहु तुम अपने लिए साड़ी पसंद कर लो, लेकिन ध्यान रखना ज्यादा महंगी मत लेना अभी शादी पर बहुत खर्चा हुआ है।'मैं तुम्हारी ममता दीदी के लिए भी एक सस्ती सी साड़ी देख लेती हूं तब तक।' बहू को लगा कि सास सही कह रही है।उसने ₹१७00 की साड़ी पसंद कर ली ।तब तक सास ने भी ममता दीदी के लिए साड़ी पसंद कर ली और तुरंत ही दुकानदार को दोनों साड़ियों को डिब्बों में पैक करवाने के लिए भी कह दिया।सास ने तुरंत बिल भर दिया ।जिस पर ममता का कोई ध्यान नहीं था। दोनों खुशी-खुशी घर लौट आए । बहु के हाथ से सासुमा ने साड़ी का ए...
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