मैं और तुम
माना कि खुली आंखों से तुम्हें मैं नहीं देख सकती . तुम मेरे आस-पास भी नहीं हो. तुम्हारी आवाज को मैं सुन नहीं सकती . तुम भी तो मेरे आंसू पोछने के लिए नहीं हो . हां लेकिन यह सच है कि बंद आंखों से मैं तुम्हें देख सकती हूं .मेरी आत्मा तुम्हें महसूस कर सकती है. तुम हो ...हां !तुम हो.. मेरे सपनों में.... मेरी हर सांस में... मेरी रूह में.... तुम मेरे जीने की वजह हो... मेरी आखरी सांस तक तुम मेरे साथ हो....क्योंकि तुम मुझसे अलग नहीं ...मुझ में ही हो....
👌
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