70 वर्ष के ओमप्रकाश और उनकी 65 साल की पत्नी सावित्री बहुत खुश थे.
अपने कपड़ों को अटैची में जमा रहे थे .बहुत दिनों के बाद उन्होंने अपने दोस्तों के साथ 2 दिन के लिए बाहर घूमने जाने का कार्यक्रम बनाया था .उनकी पैकिंग लगभग हो ही गई थी,कि तभी उनकी बहू ऑफिस से घर आ गई.
उसने आश्चर्य से पूछा "कहां जाने की तैयारी है ?"
सावित्री ने कहा बेटा हम 2 दिनों के लिए घूमने जा रहे हैं.
पड़ोस के दोस्त भी हैं तो सोचा साथ हो जाएगा तो कल सुबह चले जाएंगे .
सावित्री की बहू अंजलि ने अपना पर्स पलंग पर फेंकते हुए कहा "ओहो मम्मी !कल क्यों जाना है आपको ?????
कल तो बुधवार है.
शनिवार रविवार को चले जाते .
सावित्री ने हंसते हुए कहा कि अरे !अंजली ..
हमारे लिए क्या सोमवार और क्या शनिवार.
हम तो रिटायर हैं. क्या फर्क पड़ता है .
सब लोग जा रहे थे, तो हमने भी हां कह दी.
वह कह रहे थे शनिवार, रविवार को वहां बहुत भीड़ होती है .
अंजली ने गुस्से में कहा आपको तो पता है ना दोनों बच्चे आपके पास रहते हैं .
आप चले गए 2 दिनों के लिए तो फिर बच्चों को कौन रखेगा????
बिना सोचे समझे आप लोग प्रोग्राम बना लेते हैं.
हम से पूछना तो था आपको .
ओम प्रकाश और सावित्री एक दूसरे को देखते रहे ...
कुछ ना कहते हुए ना जाने कितना कुछ कह गई उनकी आंखें .....
ममता की शादी को अभी 6 महीने ही हुए थे । वह खुद को अपने ससुराल के रंग में रंगने की कोशिश कर रही थी ।इत्तेफाक से उसकी ननद का नाम भी ममता ही था ।हालांकि ममता दीदी उससे बड़ी थी और उनकी शादी हो चुकी थी। वह अपने ससुराल में बेहद खुश थी। सावन का महीना शुरू होने ही वाला था। ममता का यह पहला त्यौहार था इसलिए सांस ने सोचा क्यों ना बहू को साड़ी दे दी जाए। सास और बहू दोनों ही साड़ी की दुकान पर पहुंच गई। सास ने बहू से कहा ...'बहु तुम अपने लिए साड़ी पसंद कर लो, लेकिन ध्यान रखना ज्यादा महंगी मत लेना अभी शादी पर बहुत खर्चा हुआ है।'मैं तुम्हारी ममता दीदी के लिए भी एक सस्ती सी साड़ी देख लेती हूं तब तक।' बहू को लगा कि सास सही कह रही है।उसने ₹१७00 की साड़ी पसंद कर ली ।तब तक सास ने भी ममता दीदी के लिए साड़ी पसंद कर ली और तुरंत ही दुकानदार को दोनों साड़ियों को डिब्बों में पैक करवाने के लिए भी कह दिया।सास ने तुरंत बिल भर दिया ।जिस पर ममता का कोई ध्यान नहीं था। दोनों खुशी-खुशी घर लौट आए । बहु के हाथ से सासुमा ने साड़ी का ए...
Yeah saach main Kai ghaaro main hota hoga. Dada-dadi ya nana-nani pyaar se bachcho ki jimmedariya le lete hai par apna freedom kho dete hai.
ReplyDeleteHmmm
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