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XXL मेरा प्यारा दोस्त

कई सालों के बाद जब आपको आपके रिश्तेदार या आपके पुराने दोस्त मिलते हैं ,उनका सबसे पहले जो वाक्य होता है, वह होता है ....अरे !!!!!"कितनी मोटी हो गई हो ".
पहले तो कितनी दुबली थी ....क्या बात है??? कुछ करो... कितना वजन तुमने put onकर लिया है.

पुराने एल्बम देखते समय भी बच्चे और दोस्त यही कहते हैं ...' वाह!!! आप पहले कितनी दुबली थी.
 
सचमुच मुझे अब इनकी बातों का बुरा नहीं लगता.
क्योंकि मेरा एक सच्चा दोस्त वह है XXL.

मॉल में जब भी जाती हूं, ऐसा लगता जरूर है मुझे ,कि इस बार XLसाइज आ जाएगा .

चेंजिंग रूम के वह चार आईने मुझ पर हंसते ..'कहते अभी थोड़ा टाइम लगेगा . अभी वजन कम नहीं हुआ आपका..

दौड़कर में अपने पुराने दोस्त की तरफ जाती और वह भी मुझे मुस्कुरा कर देखता और कहता'' हां !!!
"  मैं हूं  ना......" तुम्हारा प्यारा  सा दोस्त XXL.

कोशिश अभी जारी है हो ना हो ;कभी ना कभी; मैं XL ,L मे फिट हो जाऊंगी....
आप जानते हैं कि मैं कपड़ों का रंग ,कपड़ों की डिजाइन बाद में देखती हूं ..
सबसे पहले मेरा सवाल होता है "क्या इसमें डबल एक्सेल है?????
कपड़े चाहे जो भी साइज के हो.
आप उन कपड़ों में खुद को खूबसूरत महसूस करें .
आप उनमें कंफर्टेबल महसूस करें .
आप आईने में देखें तो आपको अच्छा लगे .
क्या फर्क पड़ता है चाहे वह फिर साइज L हो या XXL......

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