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एक फोन आया और सब कुछ बदल गया....

रविवार की प्यारी सी सुबह ..
मेरी नींद खुली करीब करीब 7:30 बजे .
ब्रश लेकर बालकनी पर आई ,देखा तो पौधों में पानी डालना थोड़ा बाकी था , थोड़ी मिट्टी बाहर गिर गई थी
सोचा कर लूंगी बाद में .
हॉल में आकर देखा तो पाया टाटा स्काई का रिमोट औंधे मुंह सोफे पर पड़ा हुआ था .टीवी का रिमोट कहीं और ही बेचारा सा नजर आ रहा था .बीन बैग कुछ अलग सा आकार  लिए हुए सो रहा था ,मानो अभी उसकी नींद पूरी नहीं हुई.
रात को बच्चों ने जो यहां PS4 खेलते समय पार्टी की थी ,उसके सारे निशान दिख रहे थे पैरों के निशान ,खाली कोल्ड ड्रिंक की बोतल गिरी हुई .
4 ग्लास यहां वहां पड़े हुए थे .
बच्चों ने जो चिप्स खाई थी उसकी खाली पैकेट उन्होंने बस यूं ही छोड़ दिए थे डाइनिंग टेबल पर .
यदि fingerprints लिए जाए तो शायद पता ही नहीं चले कितने लोग थे??????
हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी कि किचन का रुख करूं ...फिर भी डरते हुए मैं चली ही गई... तो देखा रात को बनी बिरयानी के बर्तन रखे हुए थे .कांच के काफी सारे बर्तन पड़े हुए थे .
रात को यही सोच कर मैं सो गई थी कि अगली सुबह सब हो ही जाएगा . ..
मेरे बेटे के कमरे में गई देखा तो साहबजादे ऐसे सो रहे थे जैसे पहले कभी सोए ही नहीं थे.
कहीं खिलौने ,किताबें, लैपटॉप कहीं और मोबाइल कहीं और ही पड़ा था ,और उसका चार्जर तो  बेचारा कहीं  लटका हुआ पड़ा था .
यह सब कुछ अनदेखा करके मैंने सोचा आज तो शांति है चाय बन रही थी रही थी और मैंने बाहर बरामदे में पड़ा हुआ पेपर उठाया .
एक हाथ में चाय और एक हाथ में अखबार मजा ही आ जाता है .
फिर पड़े हुए 2 दिन के अखबार मुझे देख रहे थे मैंने उनसे कहा जगह पर तुम्हें रख दूंगी .

अचानक याद आया कि कल लॉन्ड्री भी नहीं की थी... सोचा आज तो कर ही लूंगी
आज तो रविवार है सारा काम हो ही जाएगा समय पर.
पहले पेपर पढ़ लिया जाए .. चाय की चुस्की  बस यहां शुरू होने ही वाली थी .....

.......एक फोन बजा... सुबह सुबह यह फोन मेरे लिए चौंकाने वाला था .फोन पर मैंने हेलो कहा और उसके बाद मेरे पैरों तले जमीन निकल गई .
हाथ में रखी चाय की प्याली छूट गई .पेपर के सारे पन्ने उड़ गए और मैं बीन बैग  पर जा गिरी ...
.......आखिर किसका फोन था ....फोन पर किस ने मुझसे बात की ???और क्या बात की???
जिसे सुनते  ही मेरी रविवार की सारी की सारी प्लानिंग पर ठंडा बर्फीला पानी गिर गया....
मेरी आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया.
और मुझे धुंधला धुंधला दिखाई देने लगा ...
फ्लोर पर पैरों के निशान ,...
डाइनिंग टेबल पर पड़े हुए खाली पैकेट ...
गमले से निकली हुई वह मिट्टी जो बालकनी को खराब कर रही थी...
लॉन्ड्री के कपड़े जो ....अब तक नहीं धुले थे ,
किचन के सिंक में पड़े हुए वह बर्तन जो अभी मुंह उठाए मेरी ओर देख रहे थे ...
आप जानते हैं वह फोन किसका था और किसने मुझसे क्या कहा??????
वह फोन था मेरी प्यारी ,दिल के सबसे करीब मेरी मेड का जिसने मुझसे कहा "दीदी आज मैं काम पर नहीं आऊंगी"""//////:(

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