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पानी पुरी

शीर्षक को पढ़कर इस आर्टिकल को जो भी पढ़ रहे हैं वह लगता है मेरी तरह है पानी पुरी के शौकीन है.
सचमुच पानी पूरी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाना स्वाभाविक है .
खाना खाने के पहले या बाद में पानी पुरी हम कभी भी खा सकते हैं.
  यूं तो हम घर पर भी पानी पूरी खाते हैं.
लेकिन सड़क के किनारे भैया जी की गाड़ी में पानी पुरी खाने का मजा ही कुछ अलग होता है.

हम सभी में किसी को पानी पुरी आलू के साथ ,
तो किसी को रगड़े के साथ पसंद आती है .
पानी पुरी का पानी किसी को तीखा ,
तो किसी को  मीठा ,किसी को खट्टा ,
तो किसी को खट्टा मीठा अच्छा लगता है .
किसी को पानी पुरी के साथ  प्याज अच्छी लगती है. किसी को पानी पूरी में बूंदी अच्छी लगती है .जो भी हो पानीपुरी हम सबकी फेवरेट होती है .

ऐसा नहीं लगता कि हमारे दोस्त भी पानी पुरी की तरह होते हैं. कुछ दोस्त होते हैं तीखे पानी की तरह थोड़े से   तीखे होते हैं ...
जो बस बोलते हैं तो थोड़ा सा तीखा  ही बोलते हैं .
कुछ दोस्त होते हैं जो हमेशा अच्छा अच्छा ही बोलते हैं मीठे पानी पुरी की तरह .
और कुछ होते हैं मेरी तरह खट्टे मीठे जो मन में आया बोल देते हैं कभी अच्छा तो कभी बुरा .
फिर भी दोस्त दोस्त होता है.
लेकिन आपने कभी गौर किया है कि जब एक साथ दो तीन पानी पुरी हमें मिले उसमें से एक  पूरी तो टूट जाती है..
इसी तरह से जब हम एक साथ बहुत सारे दोस्त बना लेते हैं, सब के साथ अच्छा रिश्ता बना पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है .
हमारे खास दोस्त कुछ कम ही होते हैं जिन्हें हम अपने मन की सारी बातें कर सकते हो .
हमें भी पानी पुरी की तरह अपने दोस्तों को संभाल कर रखना चाहिए क्योंकि ....
Har Ek Friend Zaroori Hota Hai.....

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