सर्दियों की सुबह
इस बार की सर्दियां उन मेहमानों की तरह है जो यह कह कर आते हैं कि बस 2 दिनों में जाएंगे लेकिन जाने का नाम ही नहीं लेते.
सर्दियों में जब भी 6:00 बजे का अलार्म बजता है तो यही लगता है अरे आज सुबह कुछ ज्यादा ही जल्दी हो गई है.....
अलार्म को बंद करते हैं यह कहते हैं चलो 2 मिनट में उठ ही जाते हैं.
वह 2 मिनट 20 मिनट में कब बदल जाते हैं पता ही नहीं चलता और जब नींद खुलती है तो देर इतनी हो चुकी होती है कि हम राजधानी एक्सप्रेस बन जाते हैं और दौड़ कर सबसे पहले गीजर चालू होता है और गैस पर चढ़ जाती है अदरक वाली चाय .
चाहे पोहा हो या उपमा ,चाहे सब्जी किसी की भी हो लेकिन हर चीज में मटर का डलना कंपलसरी हो जाता है.......
घर में सबको पता होता है कि ठंड है ..फिर भी सब एक दूसरे से कहते हैं 'आज बहुत ठंड है ना!'
बच्चे ना नुकुर करके नहा धोकर तैयार हो जाते हैं और फिर शुरू होती है मां की हिदायतें स्वेटर की चेन बंद करो ,कान में टोपी पहनो.....
पतिदेव बहाने बनाते हैं जिम ना जाने के. बस एक ही बहाना आज ठंड थोड़ी ज्यादा है कल जरूर जाऊंगा. बस फिर क्या अदरक वाली गरम गरम चाय अख़बार और वह हल्की से, गुनगुनी धूप जो चुपके से घर की बालकनी में आने ही वाली है..........
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Kya baat hai! Sardiyon ki baat hi kuch alag hai, mera favorite season hai yeh! Mujhe yeh us mehmaan jaisa lagta hai jo itna pasand ho ki kabhi na jaay aaisa lagta hai. :-)
ReplyDeleteThx dear 😘
DeleteThx mrudu
ReplyDeleteWahhh Payal👌👌😍😘
ReplyDeleteThx
DeleteTrue😀
ReplyDeleteThx
DeleteCongratulations Payal!!
ReplyDeleteThx dear...
DeleteCongrats very nice
ReplyDeleteNice one
ReplyDeleteWow
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