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महरी (सेविका)

                              महरी

सावला चेहरा ,   माथे पर  बड़ी ,गोल ,लाल बिंदी,हाथों में कांच की हरी हरी ढेर सारी चूड़ियां ,कानों में सोने के झुमके, लाल फूलों वाली साड़ी पहने रामकली ने घर में घुसते ही पूछा जीजी कहां हो ?

रामकली पिछले 10 सालों से वर्मा मैडम के घर काम कर रही थी. वजन कुछ 80-85 किलो होगा लेकिन सफाई ऐसे करती थी ,घर चमक जाता था.

मैडम भी अकेले रहती थी रामकली को काम करने में पूरे 2 घंटे लगते थे .वर्मा मैडम और रामकली इन 2 घंटों में बहुत सारी बातें करते , रामकली की हर बात सुनना मैडम जी को अच्छा लगता था. रामकली कभी भी जरूरत के बिना छुट्टी नहीं लेती थी. दोनों का साथ अच्छा चल रहा था.
वर्मा मैडम का बेटा  लंदन में था ,बहुत जल्द भारत आने वाला था .रामकली के आते ही मैडम ने उसे कहा सुनो .."रामकली मेरा बेटा आने वाला है".
रामकली की आंखों में खुशी के आंसू आ गए 'कब आ रहा है लल्ला ?'रामकली ने पूछा .
मैडम बोली अगले हफ्ते ही आएगा तू सारा घर साफ कर देना, सामान ले आना. उसकी पसंद का सारा खाना मैं खुद बनाऊंगी .
मैडम की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं था .दोनों काम में जुट गई .
अगले दिन घर का काम निपटा कर मैडम और रामकली बाजार चले गए. एक-एक सामान उन्होंने चुन कर लिया .
घर का कोना-कोना रामकली ने सजा दिया .

रविवार की सुबह का इंतजार था और वह दिन आ ही गया.  रामकली ने आज पीली साड़ी पहनी थी उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका खुद का बेटा ही घर वापस लौट रहा है . रोहन घर के अंदर आते ही बोला मम्मा मैं आ गया. तभी रामकली के हाथ से आरती की थाली लेकर वर्मा मैडम ने रोहन की आरती की .रोहन अपनी मां को देख कर बहुत खुश हुआ और  गले लगा कर कहने लगा ओह मां तुम कैसे हो ?चलो ना अंदर ,बहुत भूख लगी है .
रामकली दरवाजे के पास अपनी कांच की चूड़ियों पर हाथ रखकर खड़ी ही रह गई .
वर्मा मैडम भी रोहन को बताना भूल गई कि यहीं रामकली है जिसने बचपन में तेरी देखभाल की थी . रामकली अंदर आकर बोली कैसे हो लल्ला हमें पहचाना नहीं क्या?
वर्मा मैडम बोली अरे !रामकली अभी तो आया है उसे खाना खा लेने दे .अभी तू घर जा और सुन मैं रोहन को लेकर उसके मामा के घर जाने वाली हूं. इसलिए कल काम पर मत आना. रामकली अपना सा मुंह लेकर  घर चली गई.

1 दिन छोड़ सुबह काम  पर  आई. रोहन बाहर बैठ कर अखबार पढ़ रहा था . लल्ला मामा के घर जाकर आ गए क्या? रामकली ने पूछा . मगर वह तो पेपर पढ़ने में बहुत व्यस्त था उसने रामकली को देखा अनदेखा कर दिया. उदास होकर रामकली अंदर चली गई उसको देखते ही वर्मा मैडम बोली देख तू ऐसा कर पूरा घर साफ कर .रामकली मैडम का घर अपने घर की तरह साफ करने लगी .लेकिन उसे लग रहा था कि  जिस रोहन को  बचपन में उसने खिलाया , लोरी गाकर सुलाया, वह आज उसे पहचान नहीं रहा.. और मैडम भी उसे बता नहीं रही कि मैं रामकली हूं .
मैं हीं तो बचपन में उसे हर रोज स्कूल ले जाती थी, उसके कपड़े धोती थी .............

अगले चार दिन रामकली काम पर नहीं आई .
वर्मा मैडम का तो गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया रामकली के ना आने के कारण सारा घर का काम उन्हें करना पड़ा . जब रामकली नहीं  आई  तो उन्हें ऐसा लगा कि रामकली के घर जाकर ही पूछना पड़ेगा आखिर वह क्यों नहीं आ रही .वर्मा मैडम रामकली के घर पहुंची . घर के दरवाजे पर खड़े होकर जोर से चिल्लाई अरे !रामकली इतने दिनों से काम पर क्यों नहीं आ रही? पता नहीं तुझे रोहन आया है कितना काम पड़ा है .तभी रामकली की बेटी बाहर आई और बोली मैडम जी अरे आप यहां ?
क्या आपको मा ने नहीं बताया कि वह काम पर क्यों नहीं आ रही? वर्मा मैडम बोली मुझे क्या पता मुझे थोड़ी बता कर गई है .कितना काम पड़ा है मेरे घर पर उसे बोल कल से काम पर आए.
रामकली की बेटी रोते हुए बोली मैडम जी आपको नहीं मालूम क्या? मां के दिल में छेद है पिछले 2 दिनों से वह सरकारी अस्पताल में भर्ती है.
बड़े डॉक्टर ने तो 1 हफ्ते पहले ही कहा था दाखिले के लिए . लेकिन मां नहीं मानी वह बोली डॉक्टर साहब उनका लल्ला रोहन लंदन से आने वाला है .
लेकिन जब तबीयत बहुत खराब हो गई तब उन्हें परसों मैं और मेरा भाई अस्पताल ले गए . पता नहीं  ऑपरेशन हो पाएगा या नहीं... डॉक्टर बोल रहे थे देर हो गई यदि वह जल्दी भर्ती हो जाती तो शायद ठीक हो जाता .
यह सुनकर वर्मा मैडम अवाक रह गई .आंखों में आंसू थे और दरवाजे पर वह गिर पड़ी उनके मुंह से बस इतना निकला अरे रामकली !एक बार तो बोल देती मुझसे ..मैं जानती हूं मुझसे भूल हो गई.......

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