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हसीन लम्हे(2)

स्वाति और अमित ने अपने छोटे से घर को बहुत प्यार से सजाया था .
घर के मुख्य दरवाजे पर लाल कंकू से उन्होंने शुभ -लाभ लिखा था और खूबसूरत तोरण से दरवाजे को सजाया था .
ड्राइंग रूम में सफेद रंग के सोफे पर रखे सुनहरे रंग के कुशन उनको और भी खूबसूरत बना रहे थे.
एक तरफ टीवी और उसके नीचे रखा हुआ डीवीडी प्लेयर जिसमें वे अक्सर सीडी लगाकर गाने सुनते थे.
कागज का फ्लावर वास रंग बिरंगे फूलों के साथ ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ा रहा था .
स्वाति ने आज खुशबूदार मोमबत्तिओं  से सारे घर को सजाया था .
स्वाति और अमित एक दूसरे का हाथ थामें बैठे हुए थे. कि अचानक सीडी पर बजने वाले गाने बंद हो गए. स्वाति उठकर सीडी  बदलने जाने लगी ,
तभी अमित ने उसका दाया हाथ पकड़ कर उसे सोफे में बैठने को कहा .
'अरे छोड़ो ना गाने बदलती हूं .' ...स्वाति ने हंसकर कहा

अमित ने कहा स्वाति मुझे तुमसे बात करनी है,

स्वाति ने कहा 'हां बोलो ना क्या बात है ?'
अमित ने स्वाति के दोनों हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा स्वीटहार्ट मुझे 4 महीनों के लिए लंदन जाना पड़ेगा ऑफिस के काम से'.....
स्वाति अचानक उठ कर खड़ी हो गई और बोली 'अमित यह तुम क्या कह रहे हो ?
इतने सालों हम दूर रहे .मम्मी -पापा भी हमारी शादी के लिए इसी शर्त पर माने थे कि हम पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें, नौकरी करें .
और अब जब मुश्किल से साथ आए हैं तो तुम मुझे छोड़कर दूर चले जाओगे ???????
स्वाति को गले लगाकर अमित ने कहा' तुम्हें क्या लगता है स्वाति मुझे छोड़ कर जाना अच्छा लग रहा है????'

मैं तुम्हें साथ ले जाना चाहता हूं लेकिन तुम्हारी जॉब यहां है .
अब तुम बताओ क्या कर सकते हैं?

स्वाति की आंखों से आंसू बहने लगे घर  में सजी मोमबत्तियां पिघलने लगी ....
स्वाति और अमित दोनों ही समझदार थे.
स्वाति भी अमित की बातों को समझ चुकी थी और अमित के कंधे पर सर रखकर बोली 'तुम जल्दी तो आज आओगे ना....'
दो प्रेम करने वालों के लिए विरह की तड़प क्या होती है . शब्दों में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है .
एक दूसरे के बिना एक एक लम्हा दोनों के लिए बहुत ही मुश्किल होने वाला था .

अमित ने बात को संभालते हुए कहा कि
स्वाती बहुत भूख लगी है खाना भी  खिलाओगी कि नहीं ....'

मेज पर आज स्वाति ने सफेद रंग की नई क्रॉकरी लगा रखी थी. फूलों का एक छोटा सा गुलदस्ता भी तैयार था. दोनों जानते थे कि उनके गले से एक भी निवाला नहीं निकलने वाला लेकिन...
एक दूसरे की खुशी के लिए दोनों ने एक ही थाली में थोड़ा खाना खा लिया ..
सारी रात करवटें बदल कर बीत गई ...
और वह दिन भी आ गया जब अमित को जाना था दोनों एक साथ ही बोल पड़े 'तुम अपना ध्यान रखना और मेरी चिंता बिल्कुल मत करना....... '
अमित ने कहा स्वाति मैं तुम्हें वहां पहुंचकर फोन करूंगा फिर बाद में हम ईमेल पर मिलेंगे .(क्योंकि 2003 में व्हाट्सएप तो था नहीं)
एयरपोर्ट में स्वाति और अमित एक दूसरे को देख रहे थे. अमित के नाम की आखिरी घोषणा हो चुकी थी .अमित का हाथ स्वाति से अलग नहीं होना चाहता था ...लेकिन उनके पास कोई दूसरा उपाय नहीं था और वह लम्हा आ गया ..जब अमित को स्वाति का हाथ छोड़ना पड़ा .
स्वाति उसे  देखती ही रह गई दूर तक.....
स्वाति घर आ गई.. फोन के पास जाकर बैठ गई उसी तरह जैसे 10 साल पहले उसने  अमित के फोन का इंतजार किया था .
सारी रात बीत गई उसे इंतजार था अमित के फोन का और तभी अचानक फोन की घंटी बजी झट से फोन उठा कर बोली 'हेलो !!!!अमित ,तुम पहुंच गए ना ???

आगे क्या हुआ??? क्या वह फोन अमित का था ???क्या वह लंदन पहुंच गया था ???
या फिर कुछ और ही घटना हो गई ???  जानने के लिए  अगला ब्लॉक पढ़िए ...

(हसीन लम्हे पेज 3 )

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